पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/४३१

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गुप्त-निबन्धावली संवाद-पत्रोंका इतिहा जनवरी सन् १८६० ई० के प्रथम अङ्कमें प्रिन्स विक्टरकी तसवी दी गई है। यहींसे भारतमित्रमें तसवीर छापे जानेकी नींव पड़ी उस समय मि० ब्राडला भी भारतवर्ष में आये थे, जो बम्बईकी कांग्रेस शरीक होकर कुछ दिन ठहर कर वहींसे लौट गये थे। ब्राडला साहर दिसम्बरके अन्तमें आये थे और प्रिन्स विकर ३ जनवरीको । काँग्रेस अन्तमें ब्राडला साहबने एक वक्तृता दी थी, जिसका जरूरी अंश भारत मित्रमें छपा है। ३० जनवरी १८६० के अंकमें स्टेट्समैन" सम्पाद मि० राबट नाइटके मरनेका शोक समाचार है। वह बड़े भारतहितैष थे। हिन्दुस्थानियोंका पक्ष करना अपना कर्त्तव्य समझते थे। उर समय हिन्दुस्थानी लोग टेट्समैनको अपना पत्र समझते थे। उर कारणसे ष्टेट्समैनका हिन्दुस्थानियोंमें आदर हुआ। अब वह बा नहीं है। मार्चके नम्बरोंमें कलकत्तेके पास दमदममें गोरे बहारा हाथसे शेख सलीमका मारा जाना और उसका हाईकोर्ट से फांसीक सजा पाकर फुलवेञ्चसे रिहाई पा जाना आदि बातोंका वर्णन है बहाराकी फांसीकी बात सुनकर साहब लोग एकदम बिगड़ गये थे उनके बिगड़नेका यह फल हुआ कि हाईकोर्टको फुलबेञ्च करके बहाराक छोड़ देना पड़ा। ___ हिन्दुस्थानकी लेजिसलेटिव कौंसिलोंके सुधारके बिलकी बात उत्त वर्षकी एक जरूरी घटना है। इस कामके लिये ब्राडला साहबने एक बिल तय्यार किया था, पर उनका बिल पेश होनेसे पहले लार्ड क्रास अपना बिल पेश कर दिया। इससे ब्राडला साहबको अन्तरं उसमें कुछ परिवर्तन करानेकी जरूरत पड़ी थी। उस बिल अनुसार कौंसिलका कुछ सुधार हुआ था, जो आज तक चल आता है। उन दिनों रोहतकके अत्याचारकी भी बहुत कुछ चर्चा थी। वहांके डिपटी कमिश्नर रेनक साहबने वहाँ [ ४१४ ]