पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/५०७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


गुप्त-निबन्धावली आलोचना-प्रत्यालोचना % D आप हरबर्ट स्पेन्सरपर फरबरीके लेखमें कुछ भक्ति दिखाते हैं। आश्चर्य नहीं, यह भी उसी विलायती विद्वान्के मगजसे निकली हुईबातकी हिन्दी हो । हरबर्ट स्पेन्सरने अपने System of synthetic Philosophy के आरम्भमें विज्ञानके दो विभाग माने हैं The Unknowable और The knowable । उसी प्रकार द्विवेदीजीकी भाषा और व्याकरण फिलासोफीके दो विभाग हैं, "अनस्थिरता” और “स्थिरता" । 'अन' हरबर्ट स्पेन्सरके यहां भी मौजूद है, और द्विवेदीजीके यहां भी देखिये, ठीक कायदा मिल गया कि नहीं ? हरबर्ट स्पेन्सरके Education में हमें Unorganizable शब्द मिला, यह भी द्विवेदीजीकी अनस्थिरताके ढंगका है। डाकखाने वालोंका Unclaimed भी इसी श्रणीका है। इसी प्रकार Unscrupulous, Unthought, Uncivilised, Unread, Ungrammatical, आदि शब्दोंमें भी द्विवेदीजी महाराजका 'अन' मौजूद है। देखिये कैसा सिद्ध किया ? Unknowable की भांति 'अनस्थिरता'का भेद जानना भी सहज नहीं है। अल्पज्ञ यह बात नहीं जान सकते । यही कारण है कि द्विवेदीजी इस परम शब्दको हिन्दीसे मानते हैं और संस्कृतसे सिद्ध करते हैं। हरबर्ट स्पेन्सर कहता है- "The Unconditioned therefore, as classable neither with any form of the conditioned nor with any other unconditioned, cannot be classed at all. And to admit that it cannot be known as of such or such kind, is to admit that it is unknowable." ____Herbert Spencer's First principles Part 1 chapter IV. The Relativity of all knowledge para 24. स्पेन्सरका Unknowable मानों द्विवेदीजीको 'अनस्थिरताहीको महिमा-वर्णन करता है। उसका सहजमें जान लेना सहज नहीं है।