पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/५९०

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गुलशने हिन्द भी जिसका नाम 'अराइशे महफिल' है हैदरबख्शहीने लिखी थी। एक और पुस्तक मुसलमान धर्म सम्बन्धी लिखी। फारसीकी प्रसिद्ध पुस्तक 'बहार दानिश' का अनुवाद किया और 'गुलजार दानिश' उसका नाम रखा ! 'तारीख नादिरी' नामकी एक और पुस्तक भी लिखी थी। मीर बहादुरअली हुसेनीने 'बदरे नजीर बेमुनीर'की कहानीको उद्दे पद्यमें लिखा और उसका नाम 'नस्र बेनजीर' रखा। एक और पुस्तक अखलाके हिन्दीके नामसे लिखी, जो फारसीकी पुस्तक 'मुर्रहउल कुलूब' की छाया पर लिखी थी। मुर्रहउल कुलूब' संस्कृतके पञ्चतन्त्रकी छाया है। यह दोनो पुस्तकें सन १८०२ ई० में लिखी गई। दिल्ली निवासी मोर अमन जो अहमदशाह दुरांनीकी तबाहीके समय दिल्लो छोड़कर पटनेमें आ बसे थे, वहांसे वह भी सन १८०१ ईस्वीमें कलकत्तं पहुंचे और उन्होंने यहां अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'बागोबहार के लिखनेको नींव डालो। यह पुस्तक सन १८०१-२ में लिखी गई । १६ वीं शताब्दिके आरम्भमें दिल्लीकी जो भाषा थी, उसका यह पुस्तक उच्च आदर्श थी। अमीर खुसरोकी फारसी पुस्तक 'चहार दरवेश'से यह पुस्तक लिखी गई। पर मीर अमनने उस पुस्तकसे इसका अनुवाद नहीं किया। वरञ्च उनसे पहले इटावा निवासी तहसीनने अमीर खुसरोकी पुस्तकसे 'नौतजे रिन्सा' नामकी एक पुस्तक लिखी थी, उससे मीर अमनने यह पुस्तक उत्तम उर्दूमें लिखी। अखलाके 'मोहसिनी'के ढङ्ग पर एक किताब 'गञ्जखूबी' उसी जमानेमें अमनने लिखी। मीर अमनकी पुस्तक 'बागोबहार' उर्दू गद्यकी सबसे पहली और उत्तम पुस्तक समझी जाती है। हफीजुद्दीन अहमद फोर्ट विलियम कालिजमें प्रोफेसर थे। सन् १८०३ ईस्वी में अबुलफजलको फारसी पुस्तक 'इयारेदानिश' का उर्दू अनु- वाद किया और उसका नाम "खिरद अफरोज" रखा। मूल पुस्तक संस्कृत पञ्चतन्त्र है और अरबीमें उसका नाम 'कलेला दमना' है। [ ५७३ ]