पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/५९२

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गुलशने हिन्द लिखी थीं। जैसे प्रेमसागर' 'राजनीति और लतायफे हिन्दी' आदि । 'सिंहासनबत्तीसी' लल्लूजी और जवानने मिलकर सन १८०१ ईस्वीमें लिखी, आधी उर्दू आधी हिन्दी है। मजहरअली विलाने 'बैतालपचीसी' लिखी। उसकी भापा भी सिंहासनबत्तोसी-सी है। मजहर अलीकी सहायतासे माधवानलकी कहानी ब्रजभाषासे उर्दूमें लिखी गई। स्वयं गिलक्राइस्टने भी १८०१ ईस्वीमें उर्दका एक कोष लिखा और कुछ उर्दू भापाके नियम भी लिखे। इससे पहले फर्गुसन साहबने उद्देका एक कोष लिखा था, पर वह अधूरा था। सन १७७३ ईस्वीमें लन्दनमें छपा था। फिर जनरल विलियम कर्क पैट्रिकने एक डिक्शनरी लिखना आरम्भ किया। इसके इन्होंने तीन भाग किये थे। पहले भागमें वह शब्द थे, जो अरबी-फारसीसे हिन्दीमें आये। यह भाग सन् १७८५ ई० में लन्दनमें छपा। शेष दो भाग नागरो टाइपके अभावसे नहीं छपे । नागरी टाइप जल्द बन न सका । लन्दनसे भारतमें आकर उन्होंने देखा कि डाकर गिलक्राइस्ट भी इसो काममें लगे हुए हैं, उन्होंने चाहा कि दोनों मिलकर काम कर, पर कामोंकी अधिकतासे पीछे वह अलग हो गये। डाकर गिलक्राइस्टने 'अंगरेजी हिन्दुस्थानी कोप'का पहला भाग सन् १७६८ ईस्वीमें छपवाया। दूसरा भाग हिन्दुस्थानी अंगरेजी पूरा न कर सके, जिसका एक कारण यह भी था, खर्चका अन्दाजा कोई ४० हजार रुपये लगाया गया था और ग्राहक मिले थे कुल ७०। इससे दुःखके साथ उन्होंने यह काम छोड़ दिया। अन्तमें सन् १८०८ ईमें डाकर टेलरने एक हिन्दुस्थानी अंगरेजी कोष बनवाया और विलियम इण्टर साहबने नजरसानी कराके फिरसे छपवाया। ____फोर्बेसका कोष १८४७ ईस्वी में लन्दनमें छपा। फ्रांसीसी बटरेण्ड साहबने पैरिसमें एक कोष सन् १८५८ ईस्वीमें छपवाया। ब्राइसका कोष [ ५७५ ]