पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/६७८

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शोभा और श्रद्धा है इच्छा दूसरी मिले सुन्दर कीमती लिबास, सेवलका काला पशमीना जाड़में हो पास । वक्षस्थल पर शोभित हो बढ़िया कशमीरी शाल, और लैंस ब्रूसलकी उसकी शोभा करे विशाल । गरमीमें रेशमके कपड़े रेशमके रूमाल, अंगुरीय हीरेकी करमें और गलेमें लाल ।। (४) चौमंजिला सङ्गमरमरका उत्तम आलीशान, बहे स्वास्थ्यप्रद बायु जहां, एक ऐसा मिले मकान । जहां भोजके लिये बने हों अच्छे घर दालान, सुन्दर सजा नाचघर और अमीराना सामान । हों अस्तबल पचासों अच्छे घोड़ोंसे भरपूर, अच्छी चोखी मदिराओंसे तहखाने मामूर ॥ एक रमना एक बाग महलके हो चौफेरे, दस सौ एकड़का हो एक अहाता धेरे। जहं भेड़ोंके झुण्ड फिर पशु चरते डोल, बच्चे उछल कूदं नाच करें किलोल । एक साथ फल फल फूल कितने ही फूल, जिसे देखे सब बागेअदनकी शोभा भूलं ।। -भारतमित्र, ३ दिसम्बर १९०४ ई० [ ६६१ ]