पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/७५

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गुप्त-निबन्धावली चरित-चर्चा लिया। पर छःही महीने पीछे हुमायू बादशाह छतसे गिरकर मर गया। अकबरने अपने पिता हुमायूँ के मरनेकी खबर सरहिन्दमें सुनी। वहाँ वह पठानोंसे लड़ रहा था। वहाँसे वह कलानोर में आया। वहां उसका राज्याभिषेक हुआ। उस समय बहुत थोडामा हिस्सा पंजाब और काबुलका उसके अधीन था, पर ५० वर्ष पीछे जब संवन १६६२ में अकबरका देहान्त हुआ, तो मारे भारतवर्षमें उसका शासन चलता था। शान्ति और सुशासनका वह बड़ा पक्षपाती था। इमीस राज्यके प्रबन्ध और प्रजाके मुग्वके लिये उमने अच्छे अच्छे नियम बनाये थे। ___ अकबर दुनिया नेकनाम बादशाहोंमेंसे था। उसने नेको और नेकनामीके बड़-बड़े काम किये, जिनके कारण आजतक लोग उमका नाम बड़े प्रेमसे लेते हैं। उसे लोगोंने सुलहकुलकी उपाधि दी थी. जिसका अर्थ है मवसे मिलकर चलनेवाला। अकबरमें सबसे बड़ा गुण यह था कि उसे किमी जाति, किमी सम्प्रदाय और किसी धम्मसे द्वप नहीं था। हिन्दुओंको उमने एसा प्रमन्न किया कि वह उमपर जी जानसे मोहित थे । हिन्दुओंने उमको 'जगद्गुरु' तककी उपाधि दे डाली थी। हिन्दी और संस्कृत पुस्तकोंमें अकबरकी बहुत कुछ प्रशंसा लिग्वा गई है। राजा रामदास कछवाहेके बनवाये हुए एक संस्कृत ग्रन्थमें अकवरकी जो कुछ प्रशंसा लिखी गई है, उमका भावार्थ इम प्रकार है- “जो ममुद्रसे सुमेरु पर्वत तक प्रजाका पालन करता है, जो गायोंको मृत्युसे बचाता है, जिसने तीर्थों और व्यापारके कर छोड़ दिये हैं, जिसने पुराण सुने और जो सूर्यका जाप करता है, जो योगका साधन करता है और गंगाजलके सिवा और कोई जल नहीं पीता, जिसने कलिकालसे घटे हुए धर्म, वेद, ब्राह्मण और गायोंकी रश्नाके लिये जन्म लिया है.---उम जलालुद्दीन अकबरकी जय हो।"