पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/७९

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गुप्त-निबन्धावली चरित-चर्चा 34 अकबरकी मृत्युकी ठीक ठीक तारीख कौनसी है, उसमें भी कुछ गड़- बड़ पड़ गई है। भारतमित्रके इस वर्षके उपहारके लिये जो जहांगीरनामा छप रहा है, उसमें मुंशी देवीप्रसाद माहब मुंसिफ जोधपुरने अकबरके मरनेकी तारीग्ब १३ जमादिउस्सानी सन १८१४ हिजरी लिग्बी है, जिसके मुकाबिलेमें कार्तिक सुदी १५ संवन १६६२ विक्रमाब्द पड़ता है। हिन्दी मितीके अनुसार कार्तिक सुदी पूर्णिमाको अकबरको मरे ३०० वर्ष होंगे, पर हिसाब लगानेसे अंग्रेजी तारीख उम दिन १६ अक्टोबर होती है, जो गत मोमवारको बीत चुकी। अकबरको मृत्यु बुधवारको हुई, यह बात निश्चय है। बुधवारको मुसलमान चहारशम्बा कहते हैं । उक्त दिनको पिताकी मृत्यु होनेसे जहांगीरने अशुभ समझा था। इसीसे चहारशम्बे- का नाम कमशम्बा रग्या और हुक्म दिया कि आगेसे चहारशम्बेको लोग कमशम्बा कहें। अकबरके मरनेके मनमें कुछ गड़बड़ नहीं है । "फोते अकबरशाह" के अङ्कोंसे उसके मग्नेका हिजरी मन १०१४ निकलता है, पर मितीमें बड़ी गड़बड़ है । यूरोपीय इतिहास-वेत्ताओंमेंसे किसीने अकबरके मरने की तारीख १३ अक्टोबर, किसीने १८ अक्टोबर और किसीने १७ अक्टो- बर लिखी है। एकने १५ लिग्बी है, पर निश्चय १६ की गई है। हिजरी तारीखोंमें भी बहुत भेद है। एकने २० जमादिउलअव्वल दूसरेने १२ जलादिग्सानी और नीमरेने २३ जमादिउलअव्वल लिखी है। “अन- फउल" अखबार में मुहम्मद अमीन बलखीने १२ जमादिउस्सानी और फरिश्तेने अपनी तारीखमें १३ जमादिउस्मानी लिखी है। फरिश्ते- वाली तारीग्वही मबसे अधिक सही समझी जाती है। ___ उसीके अनुसार १६ अक्टोबर अकबरके मरनेकी ठीक तारीख समझी गई है । इसी अकबर बादशाहके समयमें सबसे पहले भारतवर्षका इंगलैंडसे सम्बन्ध हुआ। २८ मितम्बर सन १५८५ ईस्वीको इंगलैंडकी [ २ ]