पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/८८

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शेख सादी “गुलिम्तान” और “बोम्तान” सेहो शव मादोके जीवनका बहुत- कुछ पता लगता है । मुसलमानोंके यहाँ और कुछ अधिक इनिहाम उमका नहीं मिलता। दो एक अंगरेज विद्वानोंने बड़ी चेष्टा करके उसके जीवना- की कुछ बातें संग्रह की हैं और उन्होंनेही उसकी एक जीवनी लिखी हैत- उसके सहारेसे अब दिल्लीके मौलवी हालीने शेख मादीकी एक जीवनी लिग्यो है। आश्चर्य है कि जिस देशका वह कवि था. वहां किमीने उसकी जीवनी लिग्बनेकी चेष्टा न की। जिमकी कविताको इतनी धूम है, जिसका देश-देशान्तर में इतना नाम है, उसको शकल सूरत कमी होगो, ऐसा विचार हरेक पढ़े-लिग्वे आदमी- के जीम उठता है। इमोसे बड़ी तलाशसे सादीको आकृति प्राप्त की है। जरा ध्यानसे देखना चाहिये । एक हाथमें तबर है. दुसरे में कशकोल । यह ईगनके दरवेशोंकी वजे है । छः मात मौ वर्ष पहले इगनके फकीरों- का यही वेप था । तबर या कुल्हाड़ा दरवंशोंका दण्ड था और कशकोल उनका कमण्डलु । शंग्य मादीको देशाटनका बड़ा इत्माह रहता था। अग्ब, रूम, मिसर, तातार आदि मुसलमान देशाम वह बहुधा घूमा है। दरवंशों और बुजुगांकी उसके जीमें बड़ी इज्जत थी। बहुधा उनके माथ रहा करता था। जान पड़ता है कि इमीसे उसे दरवेशाना वेश पमन्द था। “गुलिम्तान" से यह भी विदित होता है कि शंग्वने एकबार विवाह किया था। तिमपर भी अधिक जीवन उसका परिव्राजकोंके साथ हो बीता। बोम्तानका एक अंगरेजी अनुवाद कमान एच. विलबर फोस क्लाकने मन१८७६ ई० में लण्डनमें छपवाया था। उसीमें यह चित्र लगा हुआ है। कमान कहते हैं कि यह तसवीर सादीकी एक पुरानी तसवीरको नकल है। शीराज शहरके पास "हफतान" नामका एक स्थान है। वह सात दरवंशोंकी कबर हैं। यह स्थान ३३ गज चौड़ा और ११० गज