पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/९७

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गुप्त-नबन्धावली चारत-चचा इनके जिस्म खाकीका 1 इस दुनियासे ताल्लुक है, मगर वह खुद उम जिम्मे और इस दुनियासे बेताल्लुक हैं। इनकी पाक म्ह अभी इम जिम्मे खाकीहीको अपना घर बनाये हुये है, मगर इससे बेपरवा है। ___ इन बुज़ोंने नमरे उर्दुको नमरे उई बनाया। इनसे पहिले नमरे उद एक परी थी, जो बहुतसे अफ़सू] - पढ़ने और टोने-टोटके करनेसे अपने रुख रोशन की एक झलक दिखाती थी. मगर आनकी आनमें एक नज़र देखनेसे पहिले ही, उड़नछ हो जाती थी। आंखोंको इसके देग्वनेकी हसरत ही रह जाती थी। इन बुजर्गोने बड़ी मेहनतसे इसे परचाया और परीस इन्मान बनाया : जिमसे वह इम दुनियाकं लोगों के भी काम आनेके लायक बनी। ये लोग न होते, तो न जाने अभी और कितने दिन उमें जिन और परियोंकी कहानियों और शहज़ादा शहज़ादियोंक हुसनो-इश्क १९ के अफ़माने.. चलते और इन्मानोंको देव-जिन्नोंसे जंगो-जदल२१ में मसम्फ रहना पड़ता। मर मय्यद अहमद खां अंग्रेज़ी नहीं जानते थे. फिर भी आपकं कलमने उट्टको वह फायदा पहुँचाया कि कोई फाज़िलस फाज़िल २२ उद्रका हिमायती भी शायद इससे ज्यादा कुछ न कर सकता। अंग्रेज़ीक आला दर्जाक माहवार रसायल२: में जिम किस्मक इल्मी २४ अदबी२५ तारीखी और ननकीदी २६ वगैरह मज़ामीन२७ निकलते हैं इनकी बुनियादी आपने उर्दमें डाल दी। इस किस्म के मज़ामीन अब उदृमें बड़ी खूबीसे लिखे जाने लगे हैं। उर्दू अखबारनवीसीको भी आपसे बहुत मदद मिली। साफ़, मादा, मगर मुख्तसर २८ और पुरमानी२९ इबारत लिखनेके ढंगको तरकी दी। पंडित रतननाथ सरशारने फ़सानानवीसीका ढंग बदल दिया । १६-पार्थिव शरीर । १७-जादू । १८-सौन्दर्य। १९-सौन्दर्य और प्रेम । २०-थानक २१-लड़ाई । २२-विद्वान् । २३-पत्रिकाओं । २४-विज्ञान । २५-माहित्यिक. २६-आलोचनात्मक । २७-लेख । २८-संक्षिप्त । २९-सारपूर्ण । [ ८० ]