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148 : प्रेमचंद रचनावली-6
 


की छुट्टी तो मिलती नहीं, पड़ा-पड़ा सोएगा।

सरोज ने डांटा-दादाजी उसे कब बाजार भेजते हैं री, झूठी कहीं की ।

'रोज भेजते हैं, रोज। अभी तो आज ही भेजा था। कहो तो बुलाकर पुछवा दूं?'

'पुछवाएगी, बुलाऊं?'

मालती डरी। दोनों गुथ जायंगी, तो बैठना मुश्किल कर देंगी। बात बदलकर बोली-अच्छा खैर, होगा। आज डाक्टर मेहता का तुम्हारे यहां भाषण हुआ था, सरोज?

सरोज ने नाक सिकोड़कर कहा-हां, हुआ तो था, लेकिन किसी ने पसंद नहीं किया। आप फरमाने लगे-संसार में स्त्रियों का क्षेत्र पुरुषों से बिल्कुल अलग है। स्त्रियों का पुरुषों के क्षेत्र में आना इस युग का कलंक है। सब लड़कियों ने तालियां और सीटियां बजानी शुरू कीं। बेचारे लज्जित होकर बैठ गए। कुछ अजीब-से आदमी मालूम होते हैं। आपने यहां तक कह डाला कि प्रेम केवल कवियों की कल्पना है। वास्तविक जीवन में इसका कहीं निशान नहीं। लेडी हुक्कू ने उनका खूब मजाक उड़ाया।

मालती ने कटाक्ष किया-लेडी हुक्कू ने? इस विषय में वह भी कुछ बोलने का साहस रखती हैं। तुम्हें डाक्टर साहब का भाषण आदि से अंत तक सुनना चाहिए था। उन्होंने दिल में लड़कियों को क्या समझा होगा?

'पूरा भाषण सुनने का सब्र किसे था? वह तो जैसे घाव पर नमक छिड़कते थे।'

'फिर उन्हें बुलाया ही क्यों? आखिर उन्हें औरतों से कोई बैर तो है नहीं। जिस बात को हम सत्य समझते हैं, उसी का तो प्रचार करते हैं। औरतों को खुश करने के लिए वह उनकी-सी कहने वालों में नहीं हैं और फिर अभी यह कौन जानता है कि स्त्रियां जिस रास्ते पर चलना चाहती हैं, वही सत्य है। बहुत संभव है, आगे चलकर हमें अपनी धारणा बदलनी पड़े।'

उसने फ्रांस, जर्मनी और इटली की महिलाओं के जीवन आदर्श बतलाए और कहा-शीघ्र ही वीमेन्स लीग की ओर से मेहता का भाषण होने वाला है।

सरोज को कौतूहल हुआ।

'मगर आप भी तो कहती हैं कि स्त्रियों और पुरुषों के अधिकार समान होने चाहिए।'

'अब भी कहती हूं, लेकिन दूसरे पक्ष वाले क्या कहते हैं, यह भी तो सुनना चाहिए। संभव है, हमीं गलती पर हों।

यह लीग इस नगर की नई संस्था है और मालती के उद्योग से खुली है नगर की सभी शिक्षित महिलाएं उसमें शरीक हैं। मेहता के पहले भाषण ने महिलाओं में बड़ी हलचल मचा दी थी और लीग ने निश्चय किया था, कि उनका खूब दंदाशिकन जवाब दिया जाय। मालती ही पर यह भार डाला गया था। मालती कई दिन तक अपने पक्ष के समर्थन में युक्तियां और प्रमाण खोजती रही। और भी कई देवियां अपने भाषण लिख रही थीं। उस दिन जब मेहता शाम को लीग के हाल में पहुंचे, तो जान पड़ता था, हाल फट जायगा। उन्हें गर्व हुआ। उनका भाषण सुनने के लिए इतना उत्साह और वह उत्साह केवल मुख पर और आंखों में न था। आज सभी देवियां सोने और रेशम से लदी हुई थीं, मानो किसी बारात में आई हों। मेहता को परास्त करने के लिए पूरी शक्ति से काम लिया गया था और यह कौन कह सकता है कि जगमगाहट शक्ति