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गोदान : 293
 


दिन आपकी निन्दा करने लगे। मुझसे न सुना गया। मैंने कहा, बस कीजिए महाराज, रायसाहब मेरे स्वामी हैं और मैं उनकी निन्दा नहीं सुन सकता। बस इसी बात पर बिगड़ गए। मैंने भी सलाम किया और घर चला आया। मैंने साफ कह दिया, आप कितना ही ठाट-बाट दिखाएं, पर रायसाहब की जो इज्जत है, वह आपको नसीब नहीं हो सकती। इज्जत ठाट से नहीं होती, लियाकत से होती है। आप में जो लियाकत है वह तो दुनिया जानती है।

रायसाहब ने अभिनय किया-आपने तो सीधे घर में आग लगा दी।

तंखा ने अकड़कर कहा-मैं तो हुजूर साफ कहता हूं, किसी को अच्छा लगे या बुरा। जब हुजूर के कदमों को पकड़े हुए हूं, तो किसी से क्यों डरूं। हुजूर के तो नाम से जलते हैं। जब देखिए हुजूर की बदगोई। जब से आप मिनिस्टर हुए हैं, उनकी छाती पर सांप लोट रहा है। मेरी सारी-की-सारी मजदूरी साफ डकार गए। देना तो जानते नहीं हुजूर। असामियों पर इतना अत्याचार करते हैं कि कुछ न पूछिए। किसी की आबरू सलामत नहीं। दिन दहाड़े औरतों को ..

कार की आवाज आई और राजा सूर्यप्रतापसिंह उतरे। रायसाहब ने कमरे से निकलकर उनका स्वागत किया और इस सम्मान के बोझ से नत होकर बोले-मैं तो आपकी सेवा में आने वाला ही था।

यह पहला अवसर था कि राजा सूर्यप्रतापसिंह ने इस घर को अपने चरणों से पवित्र किया। यह सौभाग्य! मिस्टर तंखा भीगी बिल्ली बने बैठे हुए थे। राजा साहब यहां! क्या इधर इन दोनों महोदयों में दोस्ती हो गई है? उन्होंने राय साहब की ईर्ष्याग्नि को उत्तेजित करके अपना हाथ सेंकना चाहा था, मगर नहीं, राजा साहब यहां मिलने के लिए आ भले ही गए हों, मगर दिलों में जो जलन है वह तो कुम्हार के आंवे की तरह इस ऊपर की लेप-थोप से बुझने वाली नहीं।

राजा साहब ने सिगार जलाते हुए तंखा की ओर कठोर आंखों से देखकर कहा-तुमने तो सूरत ही नहीं दिखाई मिस्टर तंखा। मुझसे उस दावत के सारे रुपए वसूल कर लिए और होटल वालों को एक पाई न दी, वह मेरा सिर खा रहे हैं। मैं इसे विश्वास घात समझता हूं। मैं चाहूं तो अभी तुम्हें पुलीस में दे सकता हूं।

यह कहते हुए उन्होंने रायसाहब को संबोधित करके कहा-ऐसा बेईमान आदमी मैंने नहीं देखा रायसाहब। मैं सत्य कहता हूं, मैं कभी आपके मुकाबले में न खड़ा होता। मगर इसी शैतान ने मुझे बहकाया और मेरे एक लाख रुपए बरबाद कर दिए। बंगला खरीद लिया साहब, कार रख ली। एक वेश्या से आशनाई भी कर रखी है। पूरे रईस बन गए और अब दगाबाजी शुरू की है। रईसों की शान निभाने के लिए रियासत चाहिए। आपकी रियासत अपने दोस्तों की आंखों में धूल झोंकना है।

रायसाहब ने तंखा की ओर तिरस्कार की आंखों से देखा। और बोले-आप चुप क्यों हैं मिस्टर तंखा, कुछ जवाब दीजिए। राजा साहब ने तो आपका सारा मेहनताना दबा लिया। है इसका कोई जवाब आपके पास? अब कृपा करके यहां से चले जाइए और खबरदार फिर अपनी सूरत न दिखाइएगा। दो भले आदमियों में लड़ाई लगाकर अपना उल्लू सीधा करना बेपूंजी का रोजगार है, मगर इसका घाटा और नफा दोनों ही जान-जोखिम है समझ लीजिए।

तंखा ने ऐसा सिर गड़ाया कि फिर न उठाया। धीरे से चले गए। जैसे कोई चोर कुत्ता मालिक के अन्दर आ जाने पर दबकर निकल जाए।

जब वह चले गए, तो राजा साहब ने पूछा-मेरी बुराई करता होगा?