पृष्ठ:गोदान.pdf/६१

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ प्रमाणित हो गया।
गोदान : 61
 


लिए धन केवल उन सुविधाओं का नाम है, जिनसे मैं अपना जीवन सार्थक कर सकूं। धन मेरे लिए फलने-फूलने वाली चीज नहीं, केवल साधन है। मुझे धन की बिल्कुल इच्छा नहीं, आप वह साधन जुटा दें, जिसमें मैं अपनी जीवन को उपयोग कर सकूं।

ओंकारनाथ समष्टिवादी थे। व्यक्ति की इस प्रधानता को कैसे स्वीकार करते?

'इसी तरह हर एक मजदूर कह सकता है कि उसे काम करने की सुविधाओं के लिए एक हजार महीने की जरूरत है।'

'अगर आप समझते हैं कि उस मजदूर के बगैर आपका काम नहीं चल सकता, तो आपको वह सुविधाएं देनी पड़ेंगी। अगर वही काम दूसरा मजदूर थोड़ी-सी मजदूरी में कर दे, तो कोई वजह नहीं कि आप पहले मजदूर की खुशामद करें'

'अगर मजदूरों के हाथ में अधिकार होता, तो मजदूरों के लिए स्त्री और शराब भी उतनी ही जरूरी सुविधा हो जाती, जितनी फिलासफरों के लिए।'

'तो आप विश्वास मानिए, मैं उनसे ईर्ष्या न करता।'

'जब आपका जीवन सार्थक करने के लिए स्त्री इतनी आवश्यक है, तो आप शादी क्यों नहीं कर लेते?'

मेहता ने नि:संकोच भाव से कहा-इसीलिए कि मैं समझता हूं, मुक्त भोग आत्मा के विकास में बाधक नहीं होता। विवाह तो आत्मा को और जीवन को पिंजरे में बंद कर देता है।

खन्ना ने इसका समर्थन किया-बंधन और निग्रह पुरानी थ्योरियां हैं। नई थ्योरी है मुक्त भोग।

मालती ने चोटी पकड़ी-तो अब मिसेज खन्ना को तलाक के लिए तैयार रहना चाहिए।

'तलाक का बिल तो हो।'

'शायद उसका पहला उपयोग आप ही करेंगे?'

कामिनी ने मालती की ओर विषभरी आंखों से देखा और मुंह सिकोड़ लिया, मानो कह रही है-खन्ना तुम्हें मुबारक रहें, मुझे परवाह नहीं।

मालती ने मेहता की तरफ देखकर कहा-इस विषय में आपके क्या विचार हैं मिस्टर मेहता?

मेहता गंभीर हो गए। वह किसी प्रश्न पर अपना मत प्रकट करते थे, तो जैसे अपनी सारी आत्मा उसमें डाल देते थे।

'विवाह को मैं सामाजिक समझौता समझता हूं और उसे तोड़ने का अधिकार न पुरुष को है, न स्त्री को। समझौता करने के पहले आप स्वाधीन हैं, समझौता हो जाने के बाद आपके हाथ कट जाते हैं।'

'तो आप तलाक के विरोधी हैं, क्यों?

'पक्का ।

'और मुक्त भोग वाला सिद्धांत?'

'वह उनके लिए है, जो विवाह नहीं करना चाहते।'

'अपनी आत्मा का संपूर्ण विकास सभी चाहते हैं, फिर विवाह कौन करे और क्यों करे?'

'इसीलिए कि मुक्ति सभी चाहते हैं, पर ऐसे बहुत कम हैं, जो लोभ से अपना गला छुड़ा