पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१०१

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9 दृश्य १] चाँदी की डिबिया उपकार मैं देख लग गया होगा । वह यह समझ कर दिल में खुश हो रही थी, कि मैंने एक गरीब आदमी का किया । लेकिन रहा था कि यह तांबे के जीने पर खड़ी मुझे ताक रही थी, कि मैं उसका मोटा ताज़ा कुत्ता लेकर कहीं रफू चक्कर न हो जाऊँ। [वह चार पाई की पट्टी पर बैठ जाता है, और बूट पहिनता है। तब ऊपर ताक कर ] तुम सोच क्या रही हो ? [ मिन्नत करके ] क्या तुम्हारे मुंह में जबान नहीं है ? कुण्डी खटकती है, और घर की मालकिन मिसेज़ सेडन आती है । वह एक चिंतित, फूहड़ और जल्दबाज औरत है । मजदूरों के से कपड़े पहिने हुए 1] मिसेज़ जोन्स, जब तुम आई तब हमें तुम्हारी श्राहट मिल गई थी। मैंने अपने शौहर से कहा लेकिन वह कहते हैं कि मैं एक दिन के लिए भी नहीं मान सकता। ९३