पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१३८

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चांदी की डिबियाः मिसेज़ वार्थिविक [ तीव्र स्वर में] वह क्या कहेगा? यही और क्या है कि सब मन- गत है। जैक -- . [दवपट में पड़ कर] बात यह है, बात यह है, कि मुझे इसके बारे में कुछ भी मालूम नहीं मिसेज़ वार्धिविक वह तो मैं पहिले ही कहती थी। [स्नो से] वह आदमी दोदा दिलेर बदमाश है । बार्थिविक [अपने मन को दबाते हुए ] लेकिन जब मेरा लड़का कह रहा है कि इस मामले में कोई तत्त्व नहीं है तो क्या ऐसी दशा में उस श्रादमी पर मुकदमा चलाना ज़रूरी है । १३०