पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१८५

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दृश्य ] चांदी की लिबिया लिवेंस हजूर, मैं इतना ही कहता हूँ कि अगर मुझे काम मिल जाय तो मैं बड़ी खुशी से उनकी परवरिश करूँगा। लेकिन मैं क्या करूँ हजूर, मेरे तो भोजन का ठिकाना नहीं । सराय में पड़ा रहता हूँ । मैं मज़- बूत आदमी हूँ, काम करना चाहता हूँ। दूसरों से दूनी हिम्मत रखता हूं लेकिन हज़र देखते हैं कि मेरे बाल पक गए हैं बुखार के सबब से। [ अपने बाल छूता है ] इस लिए मैं जंचता नहीं। शायद इसी लिए मुझे कोई नौकर नहीं रखता। मैजिस्ट्रेट [आहिस्ता से] हाँ, हाँ ! मैं समझता हूँ कि यह एक मामला है [ लड़कियों की तरफ कड़ी आँखों से देख कर ]