पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/३७

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दृश्य ३ ]
चाँदी की डिबिया
 

बार्थिविक

क्या!

मिसेज़ बार्थिविक

मैं ने कल पत्र में एक चिट्ठी पढ़ी थी, उस आदमी का नाम भूलती हूँ, लेकिन उसने सारी बातें खोलकर रख दी थीं। तुम लोग किसी बात की असलियत नहीं समझते।

बार्थिविक

हूँ! ठीक।

[ भारी स्वर से ]

मैं लिबरल हूँ, इस विषय को छोड़ो।

'मिसेज़ बार्थिविक

टोस्ट दूँ? मैं इस आदमी के विचारों से सहमत हूँ! शिक्षा, नीची श्रेणी के आदमियों को चौपट कर रही है। इस से उनका सिर फिर जाता है, और यह सभी के लिये हानिकर है। मैं

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