पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/८७

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दृश्य ३ ]
चाँदी की डिबिया
 

रात को सोने नहीं पाती तब कुछ अखरता है।

बार्थिविक

हूँ! और तुम सब कमरों में झाड़ू लगवाती हो! कभी कभी बार्वची को बुलाने भी जाना पड़ता है? क्यों न?

मिसेज़ जोन्स

हाँ हुज़ूर!

बार्थिविक

आज भी तुम्हें जाना पड़ा था?

मिसेज़ जोन्स

हां हु़जूर भाजी वाले को दूकान तक गई थी।

बार्थिविक

ठीक! तो तुम्हारा शौहर कुछ कमाता नहीं और बदमाश है?

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