पृष्ठ:जायसी ग्रंथावली.djvu/३३५

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देशयाना खंड १५२ ततखन राज पंधि एक नावा। सिखर टूट जस डसन डोलावा ॥ परा दिस्टि वह राकस खोटा। ताके सि जैस हस्ति बड़ मोटा ॥ श्राइ मोहि राकस पर टूटा। गहि लेइ उड़ा, भंवर जल छूटा ॥ बोहित टक टक सब भए । एहु न जाना कहें चलि गए । भए राजा रानी दुइ पाटा। दूनों बहे, चले दुइ बाटा ॥ काया जीउ मिलाइ , मारि किए दुइ खंड । तन रोवे धरती पराजीउ चला बरग्लैंड II१ । डहन = डना, पर ।