पृष्ठ:जायसी ग्रंथावली.djvu/३८८

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पदमावत

२०६ उठा बाँध, चह दिसि गढ़ बाँधा। की गि भार जस काँधा ॥ उपजे नागि प्रागि जस बोई। अब मत कोइ मान नहि होई ।॥ भा तेवहार जी चाँचरि जोरी । बलि फाग अब लाइव होरी समदि फाग मेलिय सिर धूरी । कीन्ह जो साका चाहिय पूरी ॥ चंदन अगर मलयगिरि काढ़ा । घर घर कीन्ह सरा रचि ठाढ़ा | जौहर कहें साजा रनिवासू । जिन्ह सत हिये कहाँ तिन्ह आंसू ॥ पुरुषन्ह खड़ग भारे, चंदन खेवरे देइ । मेहरिन्ह संदुर मेला, चहहिं भई जरि खेइ ॥ १७ ॥ ग्राठ वरिस गढ़ का रहा। धनि सुलतान कि राजा महा ।॥ ग्राई साह वरार्थी जो लाए । फरे भरे पे गढ़ नहि पाए । तो ती जौहर होई। पदमिनि हाथ चढ़े हि सोई । एहि विधि ढोल दीन्ह, तव ताईं। दिल्ली से अरदासे नाई ।। पछिड़े हव दोन्हि जो पीठी । सो अब चढ़ा सौंह के दीठी । जिन्ह भ ईं माथ गगन तेइ लागा । थाने उठे, सब भागा | ाव । उहाँ साँह चितउर गढ़ छात्रा। इहाँ देस अब होड परावा जह जिन्ह पंथ न तन परत, बाठे बेर वर । निसि चैंधियारी जाई तव, बेगि उठे जौ सूर ॥ १८ ॥

०:

कीजे बेगिकाँधा = जैसा भारी युद्ध प्रापने लिया है उसी के अनुसार कीजिये । .. यही सलाह सबने दी । (१७) औभदि - एक दूसरे से अंतिम विदा लेकर । साका कोन्ह = कोति स्थापित की है । चाहिय पूरी = पूरी होनी चाहिए। सरा चिता। जहर = गढ़ घिर जाने पर जब राजपूत गढ़ की रक्षा देखते थे तब नहीं स्त्रियाँ शत्रु के हाथ में न पड़ने पाए इसके लिए पहले ही से चिता तैयार रखते थे । (जब गढ़ से निकलकर पुरुप लड़ाई में काम ना *जाते थे तब स्त्रियाँ चट चिता थीं यहीं खबरे = खौर लगाई में कूद पड़ती । जौहर कहलाता था ।) मेहरिन्ह = स्त्रियों ने । खेह = राख । (१८ ) प्राइ साह = अराव..पाए: बादशाह ने जो ग्राम के पेड़ , फलकर पर आकर लगाए वे बड़े हुएझड़ भी गए गढ़ नहीं टूटा। जो तोॐ = बादशाह कहता है कि यदि गढ़ कर । तोड़ता हूँ तो अरदारों = अर्जदाश्त, प्रा नापन । हरेव=हेरात प्रदेश का पुराना नाम " थाने उठ = बादशाह की जो स्थान स्थान पर चौकियाँ थीं वह उठ गई। जिन्ह. बबूर = जिन जिन रास्तों में घास भी उगकर बाधक नहीं अब हो सकती थी उनमें बादशाह के न रहने से बेर नौर बबूल उग पाए हैं ।