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देहात हैं। १९०३-४ ई॰ में कुल आमदनी(१२२०००) थी। तहसीलके उत्तरका प्रदेश उपजाऊ है। चावल और ईख पैदा होती है। इस तहसील में केवल जमीदारियाँ हैं। गोडेघराना, कासीमकोट, विजयानगरम और चिरयुरपल्ली जमीदारियाँ मिलाकर एक तहसील बनी है। कासीमकोट जमीदारी पहले चिकेकोल सरकारकी फौजदारीका स्थान था। सं॰ १७९४ से १८०२ ई॰ तक कासीम कोट जिलेका मुख्य ठिकाना था। १८०२ ई॰ के बाद इसका विजयनगरमें समावेश होगया (इं॰ ग॰ ५) अनकापल्ली गाँव——यह अनकापल्ली तहसील का मुख्य ठिकाना है। यह उत्तर अक्षांश १७°४२ और पू०॰ रे०॰ ८३°२` में स्थित है। यह गाँव शारदा नदीके तीर पर विजगापट्टण (विशाखपट्टनम्) गाँवके पश्चिममें २० मीलपर बसा हुआ है। यह भाग उपजाऊ है। इसलिये यहाँ से अनाज ओर गुड़ बाहरी प्रान्तोंमें भेजा जाता है। यहाँकी जनसंख्या (१९२१) २०३६० थी। यहाँ १८७८ ई॰ में म्युनिसीपैल्टी स्थापित हुई। १९०३-४ ई॰ में आय २५०००) और व्यय २१०००) था। यह गाँव सदर्नमराठा रेल्वेके वाल्टेर लाइनपर एक स्टेशन है। पानी लगभग ३४-६८`` बरसता है। (अर्नोल्ड इण्डियन गाइड, इं॰ गं ५) अनक्ज़गोरस——यह आयोनियन तत्वज्ञान का बड़ा अच्छा वेत्ता होगया है। इसका जन्म ई॰ पू॰ ५०० में एशिया माइनरके प्रसिद्ध नगर क्लेज़ोमॅनी में में हुआ था। लगभग ई॰ पू॰ ४६४ में यह क्लेजोमॅनी छोड़ कर यूनानके प्रसिद्ध नगर अथेन्समें चला आया था। यह ज्योतिष तथा गणित-शास्त्रका अच्छा विद्वान था। दूसरे यह साधुवृत्तिका पुरुष था और अपने उच्च विचारोंके लिये प्रसिद्ध था। फलतः अथेन्समें इसका अच्छा सत्कार हुआ। अथेन्सके प्रसिद्ध पुरुष पेरिक्लोज़ के साथ ही इसका अधिक समय बीतता था। प्रसिद्ध नाटक-लेखक युरीपीडिज़का यह मुख्य शिष्य था।तत्वज्ञान तथा शास्त्रीय-निदर्शनकी रुचि अथेन्स निवासियों में इसी ने पैदा की। पेलोपोनिशियन युद्धके पूर्व जब परीक्लीज़का प्रभुत्व जाता रहा तो इसपर अधर्माचरणका दोषारोपण करके अभियोग चलाया गया। किन्तु पेरिक्लीज़के प्रसिद्ध व्याख्यान से यह निर्दोष ठहराया गया। किन्तु इसे अथेन्स छोड़कर भागना पड़ा। तब यह अयोनियामें आकर लमसकसमें बस गया। यहाँ भी इसका २७
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अच्छा सत्कार हुआ। वह ई॰ पू॰ ४२८ में पर लोक सिधारा। अनक्ज़गोरसने तत्वज्ञानके इतिहासमें तात्विक विचारोंका बिल्कुल एक भिन्न ही मार्ग निकाल दिया है। दूसरी बात महत्वकी यह है कि यूनान के सब उपनिवेशोंसे खसक कर अथेन्स ही तात्विक चर्चाओका मुख्य केन्द्र उस समय होरहा था। उसके परमाणुविषयक विचारोंके कारण ही जगत्घटनाकी उत्पत्ति पर भी (यन्त्र शास्त्र विषयक तत्वों के विचार पद्धति पर) परमाणुवादके प्रसिद्ध सिद्धान्तकी छाप लग गई। उसके बुद्धि प्रामाण्यवादका ओगे चलकर अरस्तु (Aristotle) ने बहुत कुछ अनुकरण किया। वही मत अनेक टीकाकारोंने भी भविष्यमें चालू रक्खा। [इसके ज्योतिष संबंधी ज्ञान, प्राणीशास्त्र, भौतिक-शास्त्र तथा परमाणुवादके विचारों के लिये ‘विज्ञान इतिहास’ देखिये।] अनक्जिमेण्डर——यूनान में यह दूसरा प्रसिद्ध तत्ववेत्ता होगया है। इसका जन्म ई॰ पू॰ ६१० में होगया था। इसके पंथको ‘अयोनियन तत्त्वज्ञान पंथ’ कहते हैं। कुछका तो कथन है कि यह प्रसिद्ध तत्ववेत्ता थेलिसका मित्र था, किन्तु कुछका मत है कि यह उसका शिष्य रहा होगा। किन्तु इसके मत तथा विचारोंको देखते हुए इसको थेलिसका शिष्य कहना उचित नहीं जान पड़ता। थेलिसके समान इसने भी ‘विविध चमत्कारों के सहारे एक अपरिमित तत्व’ को खोज निकालने का प्रयत्न किया, किन्तु इसके अन्य सिद्धान्त थेलिसके मतसे बिल्कुल भिन्न देख पड़ते हैं। थेलिसने ‘जल’ को एक प्रधान अथवा मूलतत्व माना है किन्तु इसने जल, पृथ्वी, अग्नि इत्यादि किसीको मूल नहीं माना। उसका मत है कि केवल ’अनन्त’ ही एक सर्वव्यापी तत्व है। इस तत्वको वह ‘अनन्त’ अथवा ‘अगणित’ (Infinite) कहता था। उसका कथन है कि जल, पृथ्वी, अग्नि इत्यादि नश्वर होनेके कारण मूलतत्व नहीं कहे जा सकते। वह अपने ‘अनन्त’ के विषयमें कहता है कि वह ‘अविनाशी’ ‘अगम्य’, तथा ‘स्वयम्भू’ है। उसमें चालक अथवा प्रेरणाशक्ति (Directive Power) भी विद्यमान है। जिस प्रकार पतवार द्वारा एक जहाज़ घुमाया जाता है उसी प्रकार उस अनन्तरूपी पतवारसे यह संसार घूमा करता है। विडेव्रँडका तो कथन है कि योरप खएडमें जो ईश्वरकी कल्पनाका विकास |
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अनकापल्ली गाँव
अनक्ज़िमॅण्डर
ज्ञानकोश (अ) २०९