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कोयमबटूर, मदुरा, मलावार जिले और कोचीन राज्यके दृश्य बहुत ही सुन्दर देख पड़ते हैं। आकाश निर्मल होनेपर समुद्र भी देख पड़ता है। कहवा बोनेके कुछ समय पहले यहाँ शिकार पाया जाता था। नैर्ऋत्य दिशामें बरसातके शुरू होते ही हाथियों के झुंड दिखाई पड़ते हैं। ( ई॰ ग॰ ५) अनरण्य—सूर्यवंशी इक्ष्वाकु-कुलोत्पन्न पुरूकुत्सके लड़के सदस्युके यह द्वितीय पुत्र थे। उनके हर्यश्व और वृहदश्व नाम के दो पुत्र थे। ये अयोध्या में राज्य करते थे। इनको रावणने परास्त किया था। रणमें मरते समय अनरण्यने उसे श्राप दिया था कि मेरा ही वशंज तेरे सब परिवारका नाश करेगा। (वा॰ रामायण, उत्तर॰ स॰ १९) (२) सूर्यवंशी राजा ऋतुपर्णका पौत्र। इनकी वंशावली इस भाँति मिलती है—ऋतुपर्ण; सर्वकर्मा, अनरण्य; विघ्न। (३) जिन प्राचीन राजाओंने कार्तिक मासमें मांस निषेध किया है, उनमें से एक। महाभारत १३. ११५. ५५६१.) (४) सूर्योदय तथा सूर्यास्तके समय स्मरणीय एक प्राचीन राजा (१३°१६६°७३८४) अनल——(१) आग्नेय दिशाका दिग्पाल वसु। इसके चार पुत्र थे। उनके नाम कुमार, शाख, विशाख, तथा नागमेय थे (महाभारत आदि॰ ६७) (२) विभीषणके चार पुत्र थे। उनमें से यह यह भी एक राक्षस था। (३) गरुड़ का पुत्र (महा॰ उद्यो॰ १७) (४) यम सभामें एक राजा (महा॰ सभा॰ ८) अनला——(१) सुरभिकन्या रोहिणीकी द्वितीय पुत्री। इसकी कन्या शुकी थी (महा॰ कर्ण॰) (२) माल्यवान नामक राम सुन्दरी नामक स्त्रीसे उत्पन्न कन्या। विश्ववसू की पत्नि। अनवरुदिन——कर्नाटिक का एक नवाब इसने आरम्भमें सिपाहीके पदसे आरम्भ कर अपने भाग्यकी परीक्षा की थी। पहले निज़ाम ने इसे कर्नाटिक के बालराजका दीवान नियत किया था। कुछ कालके बाद बालराजाकी हत्या कर डाली गयी। इस समय इसने विश्वासघात करके गद्दी स्वतः दख़ल कर ली। पहले पहल यह देहलीके दरबार में भी काम कर चुका था। कुछही कालके बाद वह कोरा जाहानाबाद का सूबेदार नियत किया गया, किन्तु दुर्व्यवहार तथा अयोग्यताके कारण वह कर वसूल न कर सका और बादशाहके पास नियत समय पर रुपया न भेज सका। अतः इस नौकरी को |
तिलाजली दे वह अहमदाबाद चला आया। यहाँ निजामुलमुल्क के पिता ग़ाज़ीउद्दीनने उसे सूरत नगरमें एक जिम्मेदारी की जगह दी ग़ाज़ी उद्दीन की मृत्युके बाद जब उसका लड़का दक्षिण प्रान्त का सूबेदार हुआ तो अनवरुद्दीन राजमहेन्द्री तथा कर्नाटक की देखरेखको नियत किया गया। इस प्रदेश की देख रेख वह १७२५-४१ ई तक करता रहा। तदनन्तर इसी प्रदेश का वह सूबेदार बनाया गया। तदनन्तर निज़ामुलमुल्कके पोते मुजफ्फर जंगके साथ लड़ाई में मारा गया। कहा जाता है कि उस समय उसकी अवस्था १०७ वर्ष की थी। उसका बड़ा लड़का तो पकड़ गया किन्तु दूसरा लड़का मुहम्मद अली त्रिचनापली भाग गया। अबदी नामक कवि ने ‘अनवर नामा’ नामक उसका जीवन चरित्र लिखा है। उसमें अनवरकी बहुत प्रशंसा की है। उसमें मेजर लॉरेन्सके पराक्रम, तथा अंग्रेजों और फ्रान्सीसी युद्धों का ठीक ठीक हाल दिया है। हैदराबाद के नवाब नासिर जंगने अनवरुद्दीनके पुत्र मुहम्मद अलीको कर्नाटिक का सूबेदार बनाया। (बील, ओरियन्टल, वायोग्रा-फिकल डिक्शननरी, इतिहास संग्रह पु॰ ३० पृ॰ ६७) अनवरी——अहद उद्दीन अली अथवा अनवरी एक प्रसिद्ध ईरानी कवि हो गया है। इसका जन्म बारहवीं शताब्दीके आरम्भमें खुरासान नगरमें हुआ था। सुलतान सञ्जीर इससे अत्यन्त प्रसन्न रहता था, और हरेक चढ़ाई पर इसे साथ ले जाता था। सुलतानके हजारस्पपर घेरा डालने के समय अनवरी तथा उसके प्रतिपक्षी रशीदीमें काव्यविषयक विवाद आरम्भ होगया था। रशीदी दुसरे किले में था। कहा जाता है कि इनकी कवितायें बाणों द्वारा इधरसे उधर भेजी जाती थी। बारहवीं शताब्दीके अन्तमें इसकी मृत्यु बल्खमें होगई। इसकी कविताओं तथा वीणागीतों का संग्रह ‘दीवान अनवरी’ नामक ग्रंथमें मिलता है। “खुरासानके आंसू” इसका सबसे बड़ा ग्रंथ है। प्रसिद्ध कवि सादीने भी कुछ कवितायें अपनी ‘गुलिस्तां’ में इसके अधार पर लिखी है। अपने समय का यह एक प्रख्यात ज्योतिषि भी माना जाता था। अनवल——यह बीजापुर ज़िलेमें बहने वाली कलादगी नदीके आग्नेय तट पर पाँचमील दूरीपर एक छोटा सा गाँव है। यहाँकी जनसंख्या लगभग १००० है। गाँवमें अनन्त, हनुमान, और रामके मन्दिर हैं। यहाँके अनन्तके मन्दिरमें शेषनागपर शयन करते हुए एक विष्णु भगवान की मूर्ति |
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अनल
अनवल
ज्ञानकोष (अ) २२४