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पृष्ठ:ज्ञानकोश भाग 1.pdf/३३१

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अफगानिस्तान
अफगानिस्तान
ज्ञानकोश (अ) ३०८

करनेका भी उपरोक्त कारण ही बताया है।

इस बातका बड़ा भय था कि इनकी मृत्युसे देशमें फिरसे बड़ी खलबली मच उठेगी, किन्तु सब शान्ति ही रही।

अमीरकी मृत्युके बाद तत्काल ही कौन्सिल की एक आवश्यक बैठक की गई। पार्लिया मेन्ट के जितने स्थानीय सभासद थे वे सब तत्काल ही एकत्रित किये गये। इस सभा में सेना विभागके मन्त्री जनरलशाह महमुदने युवराज जहीरके राज्यारोहणके लिये प्रस्ताव किया। सायंकाल ४ बजे सर्व सम्मतिसे उसे 'अमीर' मानना स्वीकार हुआ। तदन्तर प्रत्येक पदाधिकारी तथा कर्मचारीने राज्य तथा अमीरके प्रति सत्यनिष्ट रहनेकी शपथ ली।

गत इतिहास पर ध्यान देते हुए नादिरखाँ की हत्याके समाचारसे देशमें अशान्ति तथा विद्रोह की बड़ी प्रबल आशंका होने लगी थी। कुछका मत था कि कदाचित् पूर्व अमीर अमानुल्लाखाँ इटलीसे फिर स्वदेशको लौटे। कुछका मत था कि देशके भीतर ही कुछ गड़बड़ उठ खड़ी होगी। किन्तु ये सब आशंका निर्मूल रहीं। इस सबका मुख्य कारण यही विदित होता है कि नादिरखाँ की हत्या चाहे एक दुष्टने भले ही कर डाली हो किन्तु वह बड़ा लोक प्रिय था, उसकी प्रजा उस पर विश्वास रखती थी। देशवासियोंका जो अगाध प्रेम उसके प्रति था वह तो यों ही प्रकट है। उसके शवके साथ लाखो आदमी गये, बाजार इत्यादि सब बन्द हो गये तथा सबके हृदय से दुःखकी ध्वनि निकली पड़ती थी। उसकी कब्र पर नित्य सहस्त्रों मनुष्य जियारत करने आते हैं। देशवासियोंने इसे 'शहीद' मानना स्वीकार किया है। पिताके गुणों पर मुग्ध प्रजा युवा पुत्र जहीरके प्रति भी वही सम्मान तथा प्रेमके भाव रखती है। यही कारण है कि विना किसी झगड़े फिसादके इतनी सरलतासे जहीर अमीर बन बैठा। राज्यके प्रत्येक भागसे नये अमीरके प्रति सत्यनिष्ठा की शपथ लेनेके लिये सहस्त्रों मनुष्य नित्य चले आते हैं। देशके कोने कानेने इस युवाका अपना अमीर मानना स्वीकार किया है। अपने मृत पिताकी भाँति इससे भी देशवासियोको बड़ी आशा है।

इन सबके उत्तर में नये अमीरने भी एक शाही फरमान निकाल दिया है जिससे इसक हृदयका भी पता चलता है।

यह फरमान राज्दके पदाधिकारी, कर्मचारी,

तथा प्रजाके नाम है। इस फरमानका सारांश निम्नलिखित है:-जिस तत्परता तथा सहानुभूति के साथ देशके प्रत्येक व्यक्ति तथा पदाधिकारीने जहीरशाहको 'अमीर 'मानना स्वीकार किया है इसके लिये वह हृदयसे अनुगृहीत है। उसे इस बातसे बड़ा सन्तोष है कि देशमें जागृति उत्पन्न हो गई है और देश अपने सच्चे मित्र तथा सहायक को पहचान सकता है। उसे पूर्ण आशा है कि ईश्वर की कृपासे देशमें एकता रहेगी और उन्नतिके पथ पर देश अग्रसर होता रहेगा। यद्यपि उसे अपने प्रति देशका असीम प्रेम देखकर पूर्ण सन्तोष है तौ भी उस को परमात्मासे सच्चे हृदयसे यही प्रार्थना है कि उसे शक्ति तथा साहस दे कि जिस कार्यको उसके पिताने आरम्भ किया था तथा जिसके कारण उसके प्राण तक गये उसी आदर्शका वह पूर्ण रूपसे पालन करनेमें समर्थ हो।

अन्य राष्ट्रोंके सम्बन्धमें भी उसने निम्नलिखित घोषणा की है:—जो नीति स्वराष्ट्र तथा परराष्ट्रके विषयमें उसके पिता की थी उसीका पालन पूर्णरूपसे वह भी करेगा। जितने सन्धिपत्र इत्यादि उसके पिताके समयके हैं तथा जितने काल तकके लिये वे हैं, उनमें भी वह किसी प्रकार का कोई रद्दोबदल नहीं कर रहा। देशके प्रतिनिधियों की सम्मतिके आधार पर ही उसका कार्यक्रम रहेगा।

नादिरखाँ की मृत्युके बाद देशमें अशान्ति होनेकी बहुत कुछ आशंका थी। कुछका तो मत था कि कदाचित् अपनी खोई हुई सत्ताको फिरसे प्राप्त करनेके लिये इटलीसे अमानुल्लाखाँ स्वदेशमें फिरसे पदार्पण करें। ऐसा होने पर एक बार फिर चारों ओर विद्रोहकी अग्नि भड़क उठती। देश उनको अपनाने के लिये तय्यार नहीं था। कदाचित् इन्हीं सब कारणों को विचार कर अमानुल्ला खाँ ने अपना विचार स्थगित कर दिया हो।

अतः जहीरखाँका ही अमीर होना देशके लिये इस समय कदाचित् सबसे उपयुक्त था। इसके गुणोंको देख कर पूर्ण आशा की जाती है कि देश इसके शासनमें अच्छी उन्नति करेगा।

शासन प्रणाली—अफगानिस्तान की शासन प्रणाली आजकलके अधिकांश देशोंसे भिन्न है। यहाँ अमीरका ही निरंकुश शासन है और उसको सब विषयों में पूर्ण अधिकार है। इस देशके अनेक भाग किये गये हैं। काबुल, तुर्किस्तान, हेरात, कन्दहार तथा बदकशानमें अलग अलग