सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:ज्ञानकोश भाग 1.pdf/९५

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
अजन्ता
अजंता
ज्ञानकोश ( अं) ८३

सामान्यतः इन गुफाओंमें जो चित्र दिये गये हैं वे बुद्ध-चरित्र अथवा तत्कालीन जाति के इति- हासको प्रदर्शित करते हैं। बादकी बनी हुई गुफाके एक चित्रमें ईरानके राजा खुसरूके यहाँसे श्राये हुए शिष्ट मण्डलीसे अपनी राज्य सभामै मुलाकात करते हुए राजा पुलकेश दिखलाये गये हैं। निम्नलिखित दृश्यके वर्णनसे पता चलता है कि अजंताकी गुफाओके चित्र कितने हृदयंगम तथा भावोद्दीपक हैं।

मृत्यु-शय्या पर एक राज-कुमारी पड़ी हुई है जिसके नेत्र अधखुले हैं, गर्दन लटकी हुई है और सारे अवयव शिथिल पड़ गये हैं। एक दासी उसे श्राधार दिये हुए है और दूसरी उसका हाथ अपने हाथमे लेकर बड़ी ही उत्सुकताके साथ उसके मुंह की ओर देख रही है। यह विश्वास हो जानेके कारण कि राजकन्याका जीवन श्रव शीघ्र ही समाप्त होने को है दूसरी स्त्रीके चेहरे पर विषाद की गहरी छाया पड़ी हुई है। एक और दासी पीछे खड़ी होकर राजकुमारी को हवा कर रही है और बाई और दो पुरुष अति-दुःखित मुद्रासे देख रहे हैं। नीचे भूमिपर अन्य रिश्तेदार निराश स्थिति में बैठे हुये हैं उनमेसे एक स्त्री तो मुंहपर हाथ रखकर फूट फूट कर रो रही है। (गुफा नं०१६)

यह हृदय-भेदक दृश्य चित्र संसारके इतिहास मै अत्योत्तम होनेके कारण पाश्चात्य पंडित भी इसकी सर्व श्रेष्ठता स्वीकार करते है। ग्रिफिथ साहब अपनी रिपोर्ट (१८७३-७४) में लिखते हैं कि चाहे फ्लारेन्टाइन (florentine) कला इससे अधिक उत्तम चित्र भलेही खींच ले और वेनेशियन ( Venetian) कला रंगमें भलेही इससे बढ़ जाय किन्तु इसमें जो भावाका प्रदर्शन है वह और कहीं भी नहीं देख पड़ता।

गुफाओके चित्रोंमें मुख्य व्यक्ति राजा होता है। पुराने चित्रोंमें (दसवीं गुफा १५० ई०) राजा एकही जातिके प्रतीत होते हैं, परन्तु इधर उधर चित्रोंमें (३००-६३० ई०) राजा विभिन्न जातिके मालूम होते हैं। ये सभी भारतीय प्रतीत होते हैं । किसी किसी चित्रमें राजा युद्ध, आखेट अथवा यात्रा इत्यादि करते दिखाये गये हैं। किसी किसी चित्रमें राजमहल अथवा राजसभाके कार्योंमें सलग्न दिखाए गये हैं। बहुतसे चित्रों में राजाके साथ रानियोके भी चित्र हैं। उनके शरीर पर आभूषण हैं और वस्त्र ढाकेको मलमल के समान बारीक दिखाये गये हैं। राजाओं तथा

रानियोंके बाद राज-पुत्र. राजाभोके प्रधान तथा अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। दरबारी तथा स्त्रियों के चित्र बहुतसे स्थानोंमे हैं। राजमहल के चित्रों में कार्यव्यस्त सेवक सेविकाओके दृश्य दिये हैं।

नौकरोंके पहरावे भी तरह तरहके हैं। युद्ध संवन्धी चित्रोंमें राजाके साथ सैनिकोंके चित्र हैं। पुराने चित्रोंमें ( दसवी गुफा) सारे सैनिक पैदल हैं और उनके पास फरसे, भाले, और डंडोंकी तरह हथियार हैं। बादके चित्रोंमें (४००-६०० ई०) पैदल सिपाहियोंके साथ साथ घुड़सवार भी हैं और उनके पास धनुष, बाण, तलवार, भाले चक्र, - और आत्मरक्षार्थ ढाल तथा शिरस्त्राण आदि हथियार हैं। व्यापार तथा कारीगरोके संबंधके स्वतंत्र चित्र नहीं है, परन्तु स्त्रियोंके शरीर के वस्त्रालंकारसे सुनार, जुलाहे नकाशीका काम करने वालोंके कलाकौशलकी कल्पना को जा.सकती हैं । चित्रोंमें रथ आदि सवारियाँ तथा जहाज़ हैं । इससे स्थलीय तथा सामुद्रिक ब्यापारकी कल्पना की जाती है। किसानोंके चित्र बहुत कम इन चित्रोंसे विदित होता है कि वे केला (१, १३) सुपारी ( १, १८), आम (५), अंगूर (१४) इत्यादि फलोकी खेती करते थे, उसी प्रकार इन चित्रोंसे बौद्ध, जैन, तथा ब्राह्मण धर्मकी रीति रस्मोका बहुत कुछ पता चलता है। तात्पर्य यह है कि ऐतिहासिकोंके लिये ये गुफायें बड़े महत्व की है।

अजंताकी गुफाओका वर्णन निम्नांकित व्यक्तियोंने दिया है।

1. Burgess Notes on the Buckdha. Rock Temples of Ajantha.

2. Mr. Criffith's Roports ( 1874-79')

3. Mauris officers account i819 T. 3. L. S.

4. Sir James E. Alexandar's Visit in 182+

T.R. A. S. II 362.

5. Mr. Readli's uscount of a visit in 183S J. 13.

B. A. S. III Part II 71-72.

6. Lict. Blake's Description, Bombay Courier

7. Description ot' Mundu & Ajartihu. Bolnbrty Times Press 1844.

8. Mr. Fergusson's Paper J. R. A. S. 1842.

9. Dr. J. Muir's jonveey from Agra too Boinbay 1854.

10. Major Gill's Storcoscopic piolographs of Ajantha & Elura 1862.

11, Dr. Bhauu Dajo's branscripts tascd translations