पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/१५

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तिलिस्माती मुँदरी


जाते थे, मगर ढूंढ़ना बेफ़ायदा हुआ और वह उसी चश्मे पर पहुंच गये जहां से कि सुबह को कूच किया था।

इस वक्त शाम हो गई थी। कौए खाने को कुछ अंजीर और अंगूर ले आये और राजा की लड़की अपने पुराने बिस्तर पर लेट रही। वह बहुत रोई कि अब अपनी प्यारी चिड़ियों से बात नहीं कर सकती थी, लेकिन रोते २ जल्द ही नींद आ गई। सुबह होते ही वह फिर अंगूठी की तलाश में निकले, और जब कि उसकी खोज में लगे हुए थे कौओं ने देखा कि एक सिपाही एक पेड़ के नीचे पड़ा सो रहा है। एक कौआ दूसरे से कहने लगा “देख यहां एक आदमी लेटा हुआ है। जा, राजा की लड़की को ख़बरदार कर दे"। लेकिन इतने में “कौन जाता है" यों कहता हुआ सिपाही उठ खड़ा होता है और जैसे वह उठता है कौए उसकी उंगली पर जादू की मुँदरी चमकती हुई देखते हैं। जादू उसी दम अपना असर करता है और कौओं को सिपाही के सवाल का जवाब देना पड़ता है-"हम दो कमनसीब कौए हैं और आप के ताबेदार हैं"। सिपाही को उन चिड़ियों की बोली समझने से बड़ा तअज्जुब हुआ और उनसे पूछने लगा "तुम चिड़ियां होकर इस तरह बात क्योंकर कर सकते हो?" एक कौए ने जवाब दिया "साहब, आप की उंगली में एक जादू की अंगूठी है जिसके ज़ोर से आप हमारी बोली समझ सकते हैं और हम को मजबूरन आप के हर सवाल का जवाब देना पड़ता है"। “हां! यह बात है? अच्छा तो बतला किस राजा की लड़की का तू अभी जिक्र कर रहा था"। कौआ बोला “कश्मीर के राजा की लड़की का"। इस पर सिपाही कहने लगा “क्या खुब, उस लड़की के पकड़ने वाले को तो ५० अशर्फ़ी का इनाम है। क्या वह लड़की इस वक्त कहीं यहीं पर है?"