पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/२७

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तिलिस्माती मुँदरी


एक दिन राजा की लड़की फुलवाड़ी में अकेली खेल रही थी, उसने ऊपर को जो निगाह की तो देखा कि एक कंजरी बागीचे की नीची दीवार पर झांक रही है। जैसे ही उस औरत को मालूम हुआ कि मुझे लड़की ने देख लिया है उसने सिर झुका कर सलाम किया और बड़े अदब और आजिज़ी से अपना हाथ लड़की की तरफ़ चूमने लगी-फिर उसने यों अर्ज़ की कि “ऐ प्यारी बेटी, मुझे थोड़ा सा कुछ खाने को दे, मैं भूख के मारे मरी जाती हूं"-लड़की फ़ौरन घर के भीतर दौड़ गई और एक टुकड़ा रोटी का लाकर उसे दीवार के पास से देने लगी कि कंजरी ने झट एक कपड़ा उसके सिर पर डाल दिया और उसके चेहरे के चारों तरफ लपेट कर कि वह देख या बोल न सके उसकी बांड पकड़ कर दीवार के ऊपर होकर खींच लिया। फिर उसे लबादे में लपेट कर गठरी की तरह अपनी पीठ पर डाल लिया और कह दिया कि अगर तू शोर करेगी तो तेरा गला काट डालूंगी। लड़की को इस हालत में वह औरत बहुत दूर ले गई और लड़की बेचारी का लबादे के अन्दर दम घुटने लगा। अख़ीर को जब उसे उतारा और लबादे खोल डाला उसने अपने तई एक जंगल में पाया जहां कि कंजरों का एक बड़ा कुनबा पड़ा हुआ था। वह लोग ज़मीन पर लकड़ियों से आग जला रहे थे। दो तीन छोटे से ख़ेमे गड़े हुए थे और कई एक गधे पास ही चर रहे थे। जो औरत राजा की लड़की को वहां ले गई थी उससे बोली कि "तू रो मत, तुझको कोई तकलीफ़ न दी जायगी। तुझे किसी बड़े शहर में ले जायंगे और वहां किसी अमीर के हाथ बेच देंगे जिसके यहां तू ज़िंदगी भर सुख और चैन से रहेगी। लेकिन अगर तू यहां से भागने की कोशिश करेगी या अपनी मदद