पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/३६

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तिलिस्माती मुँदरी
अध्याय ५


दूसरे रोज़ सुबह को कंजरी उसे शहर के अंदर ले गई। तोता बदस्तूर उसके बाजू पर बैठा हुआ साथ गया। बहुत सी गलियों में गुज़रते हुए वह वहां पहुंचे जहां कि लौंडी-गुलामों का बाज़ार था। उस जगह बहुत से गुलाम एक बड़े बरामदे में ज़मीन पर बैठे हुए थे, और बीच में एक सफेद डाढ़ी वाला बुड्ढा एक कालीन पर बैठा हुआ हुक्का पी रहा था। सामने उसके हिसाब की किताबे यानी बही खाते और कलम दावात रक्खी हुई थीं। राजा की लड़की को कंजरी उसके पास ले गई और कान में उससे कुछ कहा। फिर लड़की को वह दालान के एक किनारे ले गई जहां कि बहुत सी लड़कियां, कोई गोरी और कोई काली, बैठी हुई थीं। उनके ऊपर एक तुंद-मिज़ाज बुढ़िया तैनात थी; वह राजा की लड़की के साथ एक तोता देख कर बहुत बड़बड़ाई, लेकिन कंजरी ने उससे कह दिया कि तोता और लड़की दोनों साथ बिकेंगे और कहा कि अगर लड़की न बिकी तो मैं शाम को आके उसको ले जाऊंगी और उसे बुढ़िया को सपुर्द कर आप चली गई।

उस बेचारी बच्ची को जब वह इस तरह पर गैरों के हाथ में छोड़ दी गई बहुत डर और रंज हुआ और ज़मीन के ऊपर दूसरे गुलाम बालकों के साथ ऐसी जगह बैठ गई जहां उसपर हर एक की नज़र न पड़े। तोते को उसने गोदी में बैठा के अपने कपड़े के अन्दर छिपा लिया इस डर से कि कोई उसे उससे ले न ले। कई शख्सों ने जो कि लौंडी ख़रीदने आये उसकी तरफ़ देखा और क़ीमत पूछी, लेकिन बुड्ढे ने जो दाम मांगा वह न दे सके। अख़ीर को एक बीबी जो