पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/३७

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तिलिस्माती मुँदरी


चिहरे से गुस्से वाली मालूम होती थी वहां होकर गुज़री" और राजा की लड़की को देख कर उस बुड्ढे के पास क़ीमत दरयात्फृ करने गई। जब यह उस निगहबान बुढ़िया ने देखा तो कहने लगी कि "मैं चाहती हूं कि यह बीबी तुझे न खरीदे क्योंकि यह शहर में सब से बदमिज़ाज औरत है। सिर्फ़ गये हत्फे की बात है कि इसने एक ग़रीब छोटी उम्र की हबशी लौंडी की अपने बुरे बरताव से ऐसी हालत कर दी कि वह उसके घर की चहार दीवारी डांक कर भाग जाने की कोशिश में ज़मीन पर गिर पड़ी और मर गई"। यह सुन कर राजा की लड़की बोली-"अजी, मिहर्बानी करके मुझे उसके हाथ मत बिकने देना"-बुढ़िया ने कहा कि “जहां तक मेरा बस चलेगा मैं ऐसा नहीं होने दूंगी, मगर वह बुड्ढा अगर चाहेगा तो बेच डालेगा" तब लड़की ने कहा-"ख़ैर, लेकिन इतना तो तुम मेरे लिए करना कि बग़ैर उस कंजरी के जाने हुए मैं इस औरत के हाथ न बिकने पाऊं, क्यों कि मैं ने एक दफ़ा उसकी और उसके सारे घर वालों की जान बचाई थी, इससे मुझे यकीन है कि वह मुझे उस बेदर्द औरत के पास न जाने देगी"-यह सब बात चीत तोते ने सुन ली और लड़की के लबादे के अन्दर से सिर निकाल के उसके कान में कहा कि “मैं अभी उड़ के जाता हूं और कंजरी को लाता हूं" और यों कह कर सीधा बाज़ार के दरवाज़े की तरफ़ उड़ा और वहां से मकानों के ऊपर होता हुआ शहर के उस फाटक पर पहुंचा कि जिसमें होकर वह सब आये थे। वहां से थोड़ी ही दूर पर उसने कंजरों का डेरा पाया। वह सीधा बुढ़िया कंजरी के पैरों के पास उतर के चोंच से उसके घांघरे का दामन खींचने लगा और फिर ज़मीन पर परों को फट-फटाता हुआ शहर के फाटक की तरफ़ चलने लगा और चुह-