पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/३८

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तिलिस्माती मुँदरी


चुहाअट मचाने और अपने सिर से हर तरह के इशारे करने लगा कि कंजरी उसके साथ चले। कंजरी समझ गई और उसके पीछे पीछे फाटक तक चली गई। तोता उसके आगे आगे उड़ता जाता था और कभी किसी जगह बैठ जाता था। यों वह बाज़ार तक पहुंचे और वहां क़दम ही रक्खा था कि उन्होंने उस बद मिज़ाज बीबी का राजा की लड़की का हाथ पकड़े हुए नाते देखा। लड़की बेचारी रोती आती थी और बाज़ार के फाटक के पास लोगों की भीड़ लग गई थी जो कि उस औरत को लानत देते थे और हल्यारी कहके तरह तरह के नाम रखते थे, और कहते थे कि अफ़सोस है यह लड़की इसके हाथ आ गई क्योंकि यह इसे ज़रूर मार डालेगी जिस तरह कि इतने और लौंडी गुलाम मार डाले हैं। जैसे ही राजा की लड़की ने, कंजरी को देखा एक बारगी अपने तई उस बद बीबी से छुड़ा कर कंजरी की गोदी में चली आई और उससे मिन्नत करने लगी कि उसे उस ख़ौफ़नाक औरत के हाथ न बिकने दे। कंजरी को रहम आया और उसने लड़की को दिलासा दी कि ऐसा नहीं होने पावेगा, लेकिन बीबी बोली-"मैं तो इसे ख़रीद भी चुकी हूं और क़ीमत भी दे चुकी हूं, देख यह रसीद है" और अपनी कुर्ती से एक टुकड़ा काग़ज़ को निकाल कर दिखलाने लगी कि तोता यकायक सारी भीड़ के ऊपर से उड़ता हुआ आकर झट उसके हाथ से कागज को छीन ले गया और सब की नज़रों से गायब हो क़रीब की एक मीनार में जा घुसा जहां उसने रसीद को छुपा दिया और फिर वहाँ से आकर बाज़ार के दरवाज़े के ऊपर बैठ गया जहां से कि वहां जो कुछ हो रहा था देख सके। इस वक्त शोरो गुल इतना बढ़ मया था कि कोतवाल जिसका मकान पास ही था सुन कर साथ अपने सिपाहियों के