पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/४०

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तिलिस्माती मुँदरी


से कहा था कि उसे ख़रीद ले। सौदा फ़ौरन हुआ। बीबी ने बहुत अच्छी क़ीमत लगाई और राजा की लड़की ने कोतवाल की बेटी और उसकी मां को सूरत शकल से इतना पसन्द किया कि कंजरी से कहा कि उसे उन्हीं के यहां बेच दे। कंजरी ने ऐसा ही किया और अपना रुपया लेकर रवाना हुई। और राजा की लड़की से कह गई कि "तू अच्छे लोगों के हाथों बिकी है और उनके यहां सुख से रहेगी"। उसके चले जाने के बाद दोनों लड़कियां छज्जे पर आके लोगों की भीड़ को जाते हुए देखने लगी कि तोता जो बाज़ार के दरवाज़े पर बैठा हुआ सब हाल देखता रहा था राजा की लड़की को छज्जे में देख उसके कंधे पर आ बैठा-कोतवाल की बेटी को यह देख कर बड़ा तअज्जुब हुआ, लेकिन राजा की लड़की ने जल्द तोते का सारा हाल सुना दिया और उसे अपने पास रखने की इजाज़त मांगी जो कि फ़ौरन मिल गई। दोनों लड़कियों में आपस में बहुत मुहबत हो गई और दोनों साथ, साथ बड़े सुख से रहने लगीं। एक ही साथ खेलती और खाती, एक ही सबक़ पढ़तीं, एक ही कमरे में सोती और हालांकि राजा की लड़की हक़ीक़त में कोतवाल की बेटी की लौंडी थी, उसके साथ बहन का सा बर्ताव किया जाता था। थोड़े दिनों के बाद राजा की लड़की ने अपना सारा असली किस्सा उसे सुना दिया, बल्कि तिलिस्माती मुँदरी का भेद भी बता दिया। एक मर्तबा रात के वक्त बाद खाने के तोते ने राजा की लड़की से कहा-“ऐ प्यारी, मैं समझता हूं कि बिहतर हो कि तेरे नाना को ख़बर कर दी जाय कि तू कहां है, वह तेरे लिए बहुत फ़िक्र करता होगा। कल सुबह मैं दोनों कौओं को जो रोज़ रात के वक्त पड़ौस के मंदिर के बुर्ज में आकर रहते हैं तेरे नाना के पास तेरी ख़बर देने को