पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/४६

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तिलिस्माती मुँदरी


और भी बढ़ा। मगर तोता जो उनकी बात चीत सुनता रहा था अपनी बैठक से उतर कर राजा की लड़की के कंधे पर आ बैठा और उसका बोसा लेकर बोला "प्यारी रो मत, मुझे एक ऐसी जगह मालूम है जहां तू छिप सकती है। हमारे दोनों कौए बाग़ के पिछवाड़े वाले पुराने खंडहर में रहते हैं। इस खंडहर की एक मीनार साबित है उसकी चोटी पर जो एक छोटी कोठरी सी है उसमें तू छिप सकती है। लेकिन उसके जीने का निचला हिस्सा गिर गया है, इस लिए सिर्फ सिड्ढी के ज़रिये तू वहां पहुंच सकती है। मैं देखता हूं कि इस कमरे के सामान में कई एक रेशम की रस्सियां लगी हुई हैं, अगर यह हमारे मिहर्बान दोस्त इन में से कुछ रस्सियों की एक सिड्ढी बना दें तो दोनों कौए उसे लेकर मीनार की चोटी तक उड़ जायँगे- मैं तब उसका एक सिरा लटकती हुई सिड्ढी में लपेट के अटका दूंगा और दूसरा सिरा तेरी तरफ़ गिरा दूंगा लेकिन सिड्ढी इतनी हलकी बननी चाहिये कि कौए उसे उड़ा ले जा सकें"-राजा की लड़की ने यह सारी बात कोतवाल की बीबी से कह दी और वह तीनों जनी रस्सी की सिड्ढी बनाने लगी। तोता एक धागे का छोटा गोला अपने पंजे में लेकर मीनार के जीने की बची हुई सिढ्डियों में सब से निचली सिड्ढी तक उड गया और धागे के ऊपर के सिरे को थाम कर गोला उसने नीचे को छोड़ दिया और साथ ही आप भी उसके पीछे उड़ता हुआ नीचे उतर गया और उसे पंजों से उठा कर राजा की लड़की के पास ले गया और उसे बता दिया कि उसमें से कितना खुल गया था जिससे मालूम हो गया कि सिड्ढी में कितनी लम्बी रस्सी लगेगी। दयादेई छज्जे में बैठ कर गली की तरफ़ देखने लगी कि जब राजा के अफ़सर उस घर की तलाशो के वास्ते आवे उसे मालूम हो