पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/४९

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तिलिस्माती मुँदरी


ज़ीने में उतरने को रास्ता है जिससे कि वह वहां चढ़ी थी-वह छज्जे पर जाने से डरती थी क्योंकि वहां से दिखलाई दे सकती थी और कोतवाल की बीबी और तोते ने उससे कह दिया था कि अगर उसे वहां कोई देख लेगा तो अच्छा न होगा इस लिये उसे वहां पर लोगों की नज़र से बचना चाहिये। कौए खाने की तलाश में गये हुए थे और तोता राजा की लड़की के साथ कुछ कलेवा कर के कि जिसके वास्ते पहले दिन वह कुछ चीज़ें लेता आया था, बाग़ में यह देखने को उड़ गया कि वहां क्या हो रहा है। वहां उस वक्त बड़ा हंगामा हो रहा था-राजा के अफ़सर कोतवाल के घर में क़ीमती चीज़ों की तलाश कर रहे थे। कोतवाल ने अपने तमाम सोने चांदी के ज़ेवर, जवाहिरात, नक़दी और जो कुछ उसके घर में क़ीमती माल था सब उनके सामने रख दिया था, उसके घोड़े घुड़साल से मंगाये जाकर सामने खड़े किये गये थे और सारे गुलाम और लौंडियां आंगन में एक पंगत में खड़ी की गई थीं कि अफ़सर जिनको पसन्द करें ले जायं। जो कुछ उन्होंने ले जाने लायक समझा उसे इकट्ठा कर के वह जा रहे थे कि एक लौंडी उनमें से कि जिन्हें वह ले जा रहे थे अफ़सरों से कहने लगी-"अजी, एक और लौंडी इस घर में कहीं छुपी हुई है वह हम सब से ज़ियादा क़ीमती है लेकिन इनको वह बहुत पसन्द है इस लिये इन्होंने उसे छुपा दिया है"-अफसरों ने पूछा “उसका नाम क्या है?"-लौंडी ने जवाब दिया "उसे हम तोते वाली कहते हैं, क्योंकि उस के पास हमेशा एक वाहियात बुड्ढा तोता रहता हैं" और तोते की तरफ़ हाथ कर के कहा- देखो तोता वह है और तोते वाली भी ज़रूर कहीं नज़दीक ही होगी”–उस लौंडी ने यह सब जलन के मारे बता दिया था-कोतवाल अफ़सरों से