पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/५०

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तिलिस्माती मुँदरी


कहने लगा-"मेरे यहां एक ऐसी लौंडी है तो सही, लेकिन मुझे मालूम नहीं वह कहां है, मेरा घर सारा खुला हुआ है तलाश कर लो"-यह बात सच थी कि उसे नहीं मालूम था कि राजा की लड़की उस वक्त़ कहां थी, उसकी बीबी ने उससे सिर्फ इतना ही कहा था कि वह एक महफूज़ जगह को चली गई हैं और ज़ियादा उसने सुनना नहीं चाहा था। अफ़सरों ने घर में उसे हर जगह तलाश किया लेकिन तलाशी फुजूल हुई। अख़ीर को उन्होंने कहा कि “वह भाग गई होगी और शायद जल्द ही पकड़ ली जायगी"-यों कहते हुए वह अपनी लूट का माल लेकर चले गये, सिवा चंद बुड्ढ़े गुलामों और लौंडियों के सारा असबाव और माल ले गये। जैसे ही वह चले गये दयादेई अपनी मां के पास दौड़ के बोली “ऐ मा, चांदनी अब तो आ सकती है?” उसकी मां ने जवाब दिया-"नहीं अभी वह जहांँ है वहांँ यहांँ से ज़ियादा बचाव से है-उसका यहांँ लाना तब तक मुनासिब नहीं जब तक कि दुश्मन की फ़ौज यहाँ से न चली जाय"-दयादेई यह सुन कर बड़ी उदास हुई, मगर कहने लगी-"अच्छा मुझे रोज़ रात को उसके पास हो आने दिया करो"-मां ने यह मंजूर कर लिया, लेकिन कहा कि जब कोई ख़तरा नज़र न आता हो तब तू ऐसा कर सक्ती है"। इसपर उसने जवाब दिया "अजी, वह प्यारी चिड़ियां निगहबानी रखेंगी, और हम पर यकायक हमला न हो सकेगा"-उसने तब राजा की लड़की को तोते के ज़रिये से एक रुक़्का भेजा कि "मैं अंधेरा होने पर तुझ से मिलने आऊंगी और साथ कुछ खाने की चीजें लाऊंगी"।