पृष्ठ:देवकीनंदन समग्र.pdf/५७९

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पांचवां बयान सन्ततिक छटव भाग केपोचव बयान में हम लिख आए है कि कमलिनी न जब कमला का मायारानी की यदि स छुडाया ता उस ताकीद कर दी कि तू गीध राहतासगढ चली जा और किशारी की खाज में इधर उधर घूमना छ।७ के घरावर उसी फिल में बैठी रह। कमन्ना ने यह बात स्वीकार कर ली और वीरन्द्रसिह के चुनारगढ़ चल जाने के बाद भी कमला ने राहतासगढ का नहीं छोडा इश्वर पर भरोसा करक उसी किले में बैठी रही। यरापि उन किले का जनाना हिस्सा बिल्कुल सूना हो गया या मगर जब स कमला न उसमें अपना डरा जमाया तर सबीर पधीय ओरत जा कमला की खातिर के लिए राजा वीरेन्द्रसिह की आज्ञानुरगर तोडियों के तार पर रख दी गई थीं वा दियाइदन लगी थी, जय गजा वीरन्दसिह यहा स चुनारगढ़ की तरफ रवाना हान लातच उन्हान भी कमला का हमीद कर दी कि तू अपनी यारी का काम में लान के लिए इधर उपर दौडना छाड के वसपर इसी किल ने बेटी रहियो और यदि चारा तरफ की सपर लिए बिना तरा जी न मानता हमार जासूसों का जाज्यातिपीली में भारत में हैं जहा जी जा मा जिया , सो तरह ज्याति पाजी का मा ताकीद कर दी थी या कमला की खातिरदारी में किसी तरह की मानहाय जि सम्म ना चाहे उसका इन्तजाम कर दिया करना इसमें भी कोई शक नहीं कि पडित 47ययातिती ने कला का दडी रगतिर का। कमला बड आराम से यहा रहा लगी ओर जासूसों के जरिये से जहा हो सका था चार तरफ कराबर भी लती रही। आज बहुत दिनों बाद कमला के पेहरे पर हसी दिखाई दे रहा है। आज वह बहुत खुश है बल्कि या कहना चाहिए कि आज उसकी खुशी का अन्दाजा करना बहुत ही कठिन है क्योंकि पडित जगननाथ ज्योतिषीने तेजसिह क हाथ की लिा चोठी कमला के हाथ में दी और जर कमला न उस खोल कर पढ़ा तो यह लिखा हुआ पाया - भर प्यार दास्त ज्यातिपीजी जगज हमलोगों के लिए बड़ी खुशी का दिन है इसलिए कि हम एयार लान किशारी कामिनी कमलिनी लाडिली और तारा का एक साथ लिए हुए राहतासगढ की तरफ आ रहे है अस्तु जहा तक हो सके पालकियों और सवारियों के अतिरिक्त फौजी सवारों को भी स्मथ लेकर तुम रचय 'उहना पहाडी के नीच हम लोगों से मिला । तुम्हारा दास्त- तेजसिह। इस चौठी के पढते ही कमलाह, मजगादे खुश हो गई और उसकी आखों से गर्म गर्म आसुओं की बूदें गिरने लगी मला भर आया और कुछ देर तक बालने या कुछ पूछन की सामर्थ्य न रही। इसके बाद अपने को सम्हाल के उसन फहा कमला~वह चोदी आपका कब मिली ? आप अभी तक गए क्या नहीं ? ज्योतिथी यह चीठी अभी मुझे मिली है मैं तेजसिह के लिख बमूणिव इन्तजाम करने का हुक्म देकर तुम्हारे पास रायर करन क लिए आया हूं और अभी चला जाऊगा। कमला-आधन बहुत अच्छा किया में भी उनसे मिलन के लिए एसे समय अवश्य चलूगी मगर मेरे लिए भी पालकी पप धन्दावरत कर दीजिए क्योंकि ऐस समय में दूसरे ढग पर वहा जान से मालिक की इज्जत में बट्टा लगगा। ज्योतिषी -बेशक एसा ही है पहिले दी से साम धुका था कि तुम हार साय चल बिता न रहोगी इसलिब तुम्हार वारते भी इन्तजाम कर चुका हूँ पालकी डयादी पर आ चुकी होगी वस तैयार हो जाओ दरमा करा। कमला अटपट तैयार हो गई और ज्यातिषीजी ने भी तेजत्तिह को लिख वमूजिव सब तयारी बात की बात में कर ली। मण्टे हैं. बाद रोहतासगढ पहाड के नीच पाच सौ सवारचौदा साने के काम की पालकियों का बीच में लिए हुए डहा sy biरफ आए दियाई दिए और पहर भर के बाद वहा जा पहुंच जहा तजसिह किशारी इत्यादि का एक गुफा अदर पता कर यारोमा बलभदतिह का साथ लिए ज्योतिषी का इन्तजार कर रहयतसिह तथा एयार लाग सुरीगुसा ज्यातिपीजी से मिल । कमला की मालकी उस गुफा के पास पहुंचाई गई जिसन किशारी और कमलिनी इत्यादि थी आर बहार सब यहा त अलाफर दिया गये। ME गुफा जिसमें कमलिनी और किशोरी इत्यादि थी ऐसी तग नथी कि उनको किसी तरह की तकलीफ हाती बल्कि 4 एका आदी हमे और बहुत ही लम्बी चौडा थी और उसमे वादानी पाइयो पहुँचता पातारारिरह की गुयानी किरगरी 14 सुजवि कमला मी आइ हेला उससे मिलने के लिए बदनामई और जब तक या पालकी के अन्दर में चन्द्रकान्ता सन्तति भाग १२ ५७१