पृष्ठ:निर्मला.djvu/२६४

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वाईसवाँ परिच्छेद
 

परमानन्द ने बालक को कण्ठ से लगा कर कहा-अच्छा बच्चा, तेरी इच्छा है तो चल। साधु सन्तों की सङ्गति का भी श्रानन्द उठा। भगवान् की इच्छा होगी, तो तेरी इच्छा पूरी होगी।

दाने पर मँडराता हुआ पत्ती अन्त को दाने पर गिर पड़ा। उसके जीवन का अन्त पिंजरे में होगा या व्याध की छुरी के तले–यह कौन जानता है?