पृष्ठ:परीक्षा गुरु.djvu/१८६

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परीक्षागुरु.
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के ग़लीचोंको मात करता है. तबेलेमैं अच्छी से अच्छी विलायती गाड़ियें और अरबी, केप, वेलर, आदिकी उम्दा उम्दा जोड़ियें अथवा जोनसवारी के घोड़े बहुतायत सै मौजूद हैं. साहब लोगों की चिठियें नित्य आती जाती हैं. अंग्रेजी तथा देसी अख़बार और मासिकपत्र बहुतसे लिये जाते हैं और उन्मैं सै ख़बरें अथवा आर्टिकलों को कोई देखे या न देखे परन्तु सौदागरों के इश्तहार अवश्य देखे जाते हैं, नई फ़ैशन की चीज़ें अवश्य मंगाई जाती हैं, मित्रोंका जल्‌सा सदैव बना रहता है और कभी कभी तो अंग्रेजों को भी बाल दिया जाता है, मित्रोंके सत्कार करनें मैं यहां किसी तरह की कसर नहीं रहती और जो लोग अधिक दुनियादार होते हैं उन्की तो पूजा बहुतही विश्वास पूर्बक की जाती है! मदनमोहन की अवस्था पच्चीस, तीस बरस से अधिक न होगी. वह प्रगट मैं बड़ा विवेकी और विचारवान मालूम होता है नए आदमियों सैं बड़ी अच्छी तरह मिलता है उस्के मुखपर अमीरी झलकती है वह वस्त्र सादे परन्तु बहुमूल्य पहनता है उस्के पिता को व्यापारी लोगोंके सिवाय कोई नहीं जान्ता था परन्तु उस्की प्रशंसा अखबारों मैं बहुधा किसी न किसी बहाने छपती रहती है और वह लोग अपनी योग्यता सै प्रतिष्ठित होनें का मान उसे देते हैं.

अच्छा! मदनमोहन नें उन्नति की अथवा अवनति की इस बिषय मैं हम इस्समय विशेष कुछ नहीं कहा चाहते परन्तु मदनमोहन ने यह पदवी कैसे पाई? पिता पुत्र के स्वभाव मैं इतना अन्तर कैसे होगया? इसका कारण इस्समय दिखाया चाहते हैं.