पृष्ठ:परीक्षा गुरु.djvu/२२१

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फूटका काला मुंह.
 

सलाह दी और समझाकर कहा कि "एक ठिकानें पर बैठे हुए दस ठिकानें हाथ आ सक्ते हैं जैसे एक दिया जल्ता हो तो उस्सै दस दिये जल सक्ते हैं परंतु जब यह ठिकाना जाता रहैगा तो कहीं ठिकाना न लगेगा" अदालत मैं मदनमोहन पर नालिश होनें सै चुन्नीलालके भेद खुलनें का भय दिखाया और अन्त मैं ब्रजकिशोर सै चुन्नीलाल नें सच्ची सफाई न की तो हीरालाल ने आप ब्रजकिशोर के साथ होकर चुन्नीलाल की चोरी साबित करने की धमकी दी और इन बातौं सै परवस होकर चुन्नीलाल को ब्रजकिशोर सै मन की सफाई रखनें के लिये दृढ़ प्रतिज्ञा करनी पड़ी.

परन्तु आज ब्रजकिशोर की वह सफाई और सचाई कहां है? हरकिशोर का कहना इस्समय क्या झूंट है? इस्के आचरण सै इस्को धर्मात्मा कोन बता सकता है? और जब ऐसे खर्तल मनुष्यका अन्तमैं यह भेद खुला तो संसार मैं धर्मात्मा किस्को कह सक्ते हैं? काम, क्रोध, लोभ, मोह का बेग कौन रोक सक्ता है? परन्तु ठैरो! जिस मनुष्य के ज़ाहिरी बरताव पर हम इतना धोका खा गए कि सवेरे तक उस्को मदनमोहन का सच्चा मित्र समझते रहे हर जगह उस्की सावधानी, योग्यता, चित्त की सफाई, और धर्मप्रवृत्ति की बड़ाई करते रहे उस्के चित्त मैं और कितनी बातें गुप्त होंगी यह बात सिवाय परमेश्वर के और कौन जान सक्ता है? और निश्चय जानें बिना हमलोगों को पक्की राय लगानें का क्या अधिकार है?