पृष्ठ:प्रताप पीयूष.djvu/१३

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प्रतापनारायण मिश्र का चरित्र तथा उनका जीवन बड़ा ही मनोरंजक है। उनकी रुचि निरे पुस्तक प्रेम की ओर कभी नहीं रही। आरंभ से ही वे आनंदमय जीवन बिताने के पक्ष में थे। उनके विषय में अभी तक जो बहुत सी रोचक बातें प्रचलित हैं और उनके मित्रों से जो कुछ उनके संबंध में ज्ञात हुआ है उसी से पता लगता है कि वे कैसे जिंदादिल आदमी थे।

अपने समय में कानपुर के सार्वजनिक जीवन को सजीव रखने में तथा जनता को सदैव जाग्रत रखने में प्रतापनारायण का प्रमुख स्थान था। शहर के दैनिक जीवन में एक खास तरह की स्फूर्ति रखने में उनकी लावनीबाजी का उल्लेख अवश्य करना चाहिए। यह अब तक प्रसिद्ध है कि कानपुर के कुछ खास चौरस्तों पर जुल्में रखाये, बाँकी टोपी सिर पर दिये हुए, लंबी नाकवाला छोटे कद का एक रसिक-हृदय सुपरिचित पुरुष उच्च स्वर से लावनी गाते हुए बहुधा देख पड़ता था। उस समय लावनीवालों का अच्छा जमघट रहता था और उन लोगों में समय समय पर आपस में तात्कालिक लावनी-रचना करने की प्रतिस्पर्द्धा तक हुआ करती थी। पंडित प्रतापनारायण का अच्छा खासा नाम था। वे एक प्रकार के लावनी-आचार्य समझे जाते थे।

वैसे भी उनकी वेश-भूषा काफ़ी हास्योत्पादक थी। तिस पर उनकी बातचीत और भी मनोविनोदक थी।

एक दफ़े की बात है कि चौकबाज़ार के एक बड़े कपड़े