पृष्ठ:प्रेमसागर.pdf/१०९

विकिस्रोत से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।



( ६१ )


पूछने औ बताने। इसमें बताते बताते श्रीकृष्ण हारे, बलदेवजी ने तब, श्रीकृष्ण की ओर वाले बलदेव के साथियों को कांधों पर चढ़ाय ले चले, तहाँ प्रलंब बलरामजी को सब से आगे ले भागा औ बन में जाय उसने अपनी देह बढ़ाई, तिस समै बिस काले काले पहाड़ से राक्षस पर बलदेवजी ऐसे सोभायमान थे, जैसे स्याम घदा पै चाँद, औ कुण्डल की दसक बिजली सी चमकती थी, पसीना मेह सा वरसता था। इतनी कथा कथ श्रीशुकदेवजी ने राजा परीक्षित से कहा-महाराज, कि जों अकेला पाय यह बलरामजी को मारने को हुआ तोहीं उन्होंने मारे घूँसों के विसे मार गिराया।