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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/१९९

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शुद्रता क्षुद्रता-संज्ञा स्त्री० नीचता । क्षुद्रप्रकृति - वि० घोड़े या खोटे स्वभाववाला । क्षुद्रबुद्धि - वि० दुष्ट या नीच बुद्धि- वाला । क्षुद्राशय - वि० नीच प्रकृति । क्षुधा -संज्ञा स्त्री० [वि० क्षुधित, क्षुधालु] भूख । तुधातुर - वि० भूखा । क्षुधावंत - वि० दे० ' दुधावान्" । सुधावान् वि० [स्त्री० क्षुधावती ] भूखा । क्षुधित - वि० भूखा । क्षुप -संज्ञा पुं० पौधा । क्षुब्ध - वि० १. चंचल । २. व्याकुल । क्षुभित-वि० क्षुब्ध | सुर-संज्ञा पुं० १. छुरा । २. पशुओं के पाँव का खुर । तुरप्र - संज्ञा पुं० १. एक प्रकार का बाण । २. खुरपा । क्षुरिका - संज्ञा बी० १. छुरी । २. एक यजुर्वेदीय उपनिषद् | तुरी-संज्ञा पुं० [स्त्री० क्षुरिनी] १. नाई । २. वह पशु जिसके पाँव में खुर हों । संज्ञा स्त्री० छुरी । क्षेत्र - संज्ञा पुं० वह स्थान जो रेखाओं से घिरा हुआ हो । क्षेत्रगणित - संज्ञा पुं० क्षेत्रों के नापने और उनका क्षेत्रफल निकालने की विधि बतानेवाला गणित । क्षेत्रज्ञ - संज्ञा पुं० १. जीवात्मा । २. परमात्मा । ३. किसान | वि० जानकार | क्षेत्रपति - संज्ञा पुं० १. खेतिहर । २. १६१ जीवाश्मा । ३. परमात्मा । दमा क्षेत्रपाल - संज्ञा पुं० १. खेत का रख- वाला । २. द्वारपाल । क्षेत्रफल -संज्ञा पुं० रकबा । क्षेत्र विद्- संज्ञा पुं० जीवात्मा । क्षेत्री - संज्ञा पुं० खेत का मालिक । क्षेप-संज्ञा पुं० फेंकना । क्षेपक - वि० १. फेंकनेवाला । २. मिश्रित । संज्ञा पुं० ऊपर से या पीछे से मिलाया हुआ अंश । क्षपण-संज्ञा पुं० फेंकना । क्षेमकरी - संज्ञा स्रो० १. एक प्रकार की a जिसका गला सफ़ेद होता है। २. एक देवी । क्षेम - संज्ञा पुं० १. सुरक्षा । २. कुशल । क्षाणि - संज्ञा खो० पृथ्वी । क्षोणिप-संज्ञा पुं० राजा । क्षोणी-संज्ञा स्त्री० दे० " क्षोणि” | क्षोभ-संज्ञा पुं० [वि० क्षुब्ध, तुभित] १. विचलता । २. व्याकुलता । ३. रंज । क्षोभण - वि० चोभित करनेवाला । संज्ञा पुं० काम के पाँच बाणों में से एक । क्षोभित: - वि० १. व्याकुल । २. भय- भीत । ३. क्रुद्ध | क्षोभी - वि० व्याकुल । क्षोम - संज्ञा पुं० दे० "चौम" । क्षौणि क्षौणी -संज्ञा स्त्री० पृथिवी । क्षौम -संज्ञा पुं० वस्त्र | क्षौर-संज्ञा पुं० हजामत । क्षौरिक - संज्ञा पुं० नाई । दमा - संज्ञा स्त्री० पृथ्वी ।