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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२०५

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खरारि १६७ गंध । २. मूत्र की सी दुर्गंध । खरारि - संज्ञा पुं० रामचंद्र | खरिया - संज्ञा स्त्री० १. घास, भूसा बाँधने की पतली रस्सी से बनी हुई जाली । पसी । २. झोली । I संज्ञा स्त्री० दे० " खड़िया " । खरियाना- क्रि० स० खलीफा संज्ञा पुं० से अरब की संख्या । खुर्राच | - वि० दे० "खर्चीला" । खर्रा -संज्ञा पुं० वह लंबा काग़ज़ जिसमें कोई भारी हिसाब या विवरण लिखा हो । १. झोली में खुर्राटा - संज्ञा पुं० वह शब्द जो सोते डालना । २. हस्तगत करना । खरिहान - संज्ञा पुं० दे० " खलियान " । खरी | संज्ञा स्त्री० १. दे० "खड़िया " | २. "खली" । खरीता - संज्ञा पुं० [स्त्री० अल्पा ० खरीती] थै । खरीद - संज्ञा स्त्री० १. मोल लेने की क्रिया । २. खरीदी हुई चीज़ । खरीदना - क्रि० स० मोल लेना । खरीदार - संज्ञा पुं० मोल लेनेवाला । खरीफ - संज्ञा स्त्री० वह फसल जो hi से गहन तक में काटी जाय । खरोंच - संज्ञा स्त्री० १. छिलने का चिह्न | खराश | २. एक पकवान । खरोंचना - क्रि० स० छीलना । खरोष्ट्री, खरोष्ठी -संज्ञा स्त्री० एक प्रा- चीन लिपि जो फ़ारसी की तरह दा- हिने से बाएँ को लिखी जाती थी । खरौंट + - संज्ञा स्त्री० दे० "खरोंच " । खरौहा - वि० ० कुछ नमकीन । खर्च - संज्ञा पुं० व्यप । खर्चा - संज्ञा पुं० दे० "ख" । खर्चीला - वि० बहुत खर्च करनेवाला । खर्जूर-संज्ञा पुं० खजूर | खर्पर - संज्ञा पुं० १. तसले के आकार का मिट्टी का बरतन । २. खोपड़ा । खर्व - वि० १. जिसका अंग भग्न या अपूर्ण हो । २. छोटा । समय नाक से निकलता है । खल - वि० १. क्रूर । २. दुष्ट | खुलक-संज्ञा पुं० दुनिया । खलड़ी - संज्ञा स्त्री० दे० " खाल" । खलता - संज्ञा स्त्री० दुष्टता । खलना - क्रि० प्र० बुरा लगना । खलबल - संज्ञा स्त्री० हलचल । खलबलाना - क्रि० प्र० १. खोलना २. विचलित होना । खलबली - संज्ञा खो० १. हलचल । २. घबराहट । खलल -संज्ञा पुं० रोक | खलास - वि० १. छूटा हुआ । २. समाप्त । खलासी संज्ञा स्त्री० मुक्ति । संज्ञा पुं० जहाज़ पर का नौकर । खलाल - संज्ञा पुं० दाँत खोदने का खरका । खलित - वि० १. चंचल | २. गिरा हुआ । खलियान - संज्ञा पुं० १. वह स्थान जहाँ फसल काटकर रखी और बर- साई जाती है । २. ढेर । + क्रि० स० खाली करना । खली -संज्ञा स्त्री० तेल निकाल लेने पर तेलहन की बची हुई सीठी । खलीता-संज्ञा पुं० दे० "खरीता" | खलीफा -संज्ञा पुं० १. अध्यक्ष । कोई बूढ़ा व्यक्ति ।