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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२०९

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भि काला करने की औषधि । खिभः -संज्ञा खी० दे० "खीज" । खिना- क्रि० भ० दे० "खीजना" । विभाना - क्रि० स० चिढ़ाना | खिड़की - संज्ञा स्त्री० मरोखा | खिताब - संज्ञा पुं० पदवी । खिदमत - संज्ञा स्त्री० सेवा । खिन्न - वि० उदासीन । खिपना - क्रि० प्र० १. खपना । २. निमग्न होना । खियाना + - क्रि० भ० रगड़ से घिस जाना । +क्रि० वि० दे० " खिलाना" 1 खिरनी-संज्ञा स्त्री० एक ऊँचा पेढ़ और उसके फल जो खाए जाते हैं। खिराज - संज्ञा पुं० कर | खिलप्रत - संज्ञा स्त्री० राजा की ओर से दी गई उपाधि या उपहार । खिलकारी | - संज्ञा स्त्री० खिलवाड़ | खिलखिलाना - क्रि० प्र० खिल खिल शब्द करके हँसना | ज़ोर से हँसना । खिलना - क्रि० प्र० १. विकसित होना । २. प्रसन्न होना । खिलवत - संज्ञा स्त्री० एकांत । खिलवाड़ - संज्ञा पुं० दे० "खेलवाड़" । खिलवाना - क्रि० स० दूसरे से भोजन कराना । क्रि० स० प्रफुल्लित कराना । क्रि० स० दे० "खेलवाना" । खिलाई - संज्ञा स्त्री० खाने या खिलाने का काम । संज्ञा स्त्री० वह दाई या मज़दूरनी जो बच्चों को खेलाती हो । खिलाड़ी - संज्ञा पुं० [स्त्री० खिलादिन ] खेलनेवाला । २०१ खील खिलाना - क्रि० स० खेख करना । क्रि० स० भोजन कराना । क्रि० स० विकसित करना । खिलाफ - वि० विरुद्ध । खिलौना - संज्ञा पुं० कोई मूर्त्ति जिससे बालक खेलते हैं । खिल्ली -संज्ञा स्त्री० हँसी । + संज्ञा स्त्री० १. पान का बीड़ा । २. कील । खिसकना - क्रि० प्र० दे० " खसकना " | खिसाना - क्रि० अ० दे० " खिसि - याना" । खिसारा - संज्ञा पुं० घाटा । खिसियाना- क्रि० प्र० १. शरमाना । २. ख़फ़ा होना । खिसी -संज्ञा स्त्री० लज्जा । खिसौहाँ - वि० १. लज्जित सा । २. कुढ़ा या रिसाया सा । खोंच -संज्ञा स्त्री० खींचना का भाव । खींच-तान -संज्ञा स्त्री० खींचाखींची। खींचना - क्रि० स० [प्रे० खिंचवाना ] १. घसीटना । २. ऍचना । १. श्र कर्षित करना । ४. चित्रित करना । खींचाखींची, खींचातानी -संज्ञा स्त्री० दे० "खींचतान " | खीज - संज्ञा स्त्री० कुँझलाहट । खीजना - क्रि० प्र० ॐ फलाना । खीझ + -संज्ञा स्त्री० दे० "खीज" । खीझना। क्रि० प्र० दे० "खीजना" | खीन + - वि० क्षीय । खीर-संज्ञा स्त्री० दूध में पकाया हुआ चावल । खीरा - संज्ञा पुं० ककड़ी की जाति का एक लंबा फल | खील- संज्ञा स्त्री० लावा । + संज्ञा स्त्री० दे० "कील" ।