२०७ ग- व्यंजन में कवर्ग का तीसरा वर्ण जिसका उच्चारण-स्थान कंठ है । गंग-संज्ञा स्त्री० गंगा नदी । गंगा - संज्ञा स्त्री० भारतवर्ष की एक प्रधान और प्रसिद्ध नदी । गंगा-जमनी - वि० मिला-जुला । गंगाजल - संज्ञा पुं० गंगा का पानी । गंगाजली - संज्ञा स्त्री० १. वह सुराही या शीशी जिसमें यात्री गंगाजल भर- कर ले जाते हैं । २. धातु की सुराही । गंगाधर - संज्ञा पुं० शिव । गंगापुत्र - संचा पुं० १. भीष्म । २. एक प्रकार के ब्राह्मण जो नदियों के किनारों पर दान लेते हैं गंगालाभ - संज्ञा पुं० मृत्यु | गंगासागर -संज्ञा पुं० १. एक तीर्थ जो उस स्थान पर है जहाँ गंगा समुद्र में गिरती है । २. एक प्रकार की बड़ी टोंटीदार भारी । गंगोदक-संज्ञा पुं० गंगाजल । गंज-संज्ञा पुं० १. सिर के बाल उड़ने का रोग । २. सिर में छोटी छोटी फुनसियों का रोग | 1 संज्ञा स्त्री० १. खजाना । २. ढेर । ३. बाज़ार । गंजन - संज्ञा पुं० १. अवज्ञा । २. पीड़ा । गंजना- क्रि० स० श्रवज्ञा करना । गंजा - संज्ञा पुं० गंज रोग । वि० जिसको गंज रोग हो । गंजी - संघा खो० ढेर । संज्ञा स्त्री० बनियायन । संज्ञा पुं० दे० "गँजेड़ी" । गंजीफा - संज्ञा पुं० एक खेल जो भ्राठ रंग के ३६ पत्तों से खेला जाता है । ग गंधक गुंजेड़ी - वि० गाँजा पीनेवाला । गठजोड़ा, गठबंधन -संज्ञा पुं० विवाह की एक रीति जिसमें वर और वधू haar परस्पर बाँध देते हैं। गंड - संज्ञा पुं० १. गाल । २. गाँठ । गंडक - संज्ञा पुं० १. गले में पहनने का जंतर या गंडा । २. गंडकी नदी का तटस्थ देश, तथा वहां के निवासी । संज्ञा स्त्री० दे० " गंडकी" । गंडकी - संज्ञा स्त्री० गंगा में गिरनेवाली उत्तर-भारत की एक नदी । गंडमाला - संज्ञा बी० कंठमाला । गंडस्थल - संज्ञा पुं० कनपटी । गंडा - संज्ञा पुं० गाँठ । संज्ञा पुं० पैसे, कोड़ी के गिनने में चार चार की संख्या का समूह । . संज्ञा पुं० श्राड़ी लकीरों की पंक्ति । गँड़ासा - संज्ञा पुं० [स्त्री० भल्पा० गँड़ासी ] चौपायों के चारे या घास के टुकड़े काटने का हथियार । गँडेरी - संज्ञा स्त्री० ईख या गन्ने का छोटा टुकड़ा । गंदगी - संज्ञा स्त्री० २. अपवित्रता । गंदना - संज्ञा पुं० लहसुन या प्याज़ की १. मैलापन । २० तरह का एक मसाला । गँदला - वि० मैला-कुचैला । गंदा - वि० [स्त्री० गंदी ] १. मैला । २. अशुद्ध । गंदुम-संज्ञा पुं० गेहूँ । गंदुमी - वि० गेहूँ के रंग का । गंध - संज्ञा श्री० १. महक । २. लेश । गंधक -संज्ञा स्त्री० [वि० गंधकी ] एक पीला जलनेवाला खनिज पदार्थ ।
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