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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२१६

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गंधबिलाव -संज्ञा पुं० नेवले की तरह का एक जंतु जिसकी गिलटी से सुगं• धित चेप निकलता है । गंधमार्जार-संज्ञा पुं० गंधबिलाव । गंधमादन -संज्ञा पुं० १. एक पुराण- प्रसिद्ध पर्वत । २. भौंरा । गंधर्व - संज्ञा पुं० १. देवताओं का एक भेद । ये गाने में निपुण कहे गए हैं । २. मृग । ३. घोड़ा । ४. प्रेत । ५. एक जाति जिसकी कन्याएँ गाती और वेश्यावृत्ति करती हैं । गंधर्व विद्या - संज्ञा स्त्री० संगीत । गंधर्वविवाह-संज्ञा पुं० म्राठ प्रकार के विवाहों में से एक । वह संबंध जो वर और वधू अपने लेते हैं । गंधर्ववेद - संज्ञा पुं० संगीत शास्त्र जो चार उपवेदों में से एक है । मन से कर गंधाना - क्रि० स० गंध देना । गंधाबिरोजा - संज्ञा पुं० चीर नामक वृक्ष का गोंद | गंधार - संज्ञा पुं० दे० " गांधार" । गंधी - संज्ञा पुं० [स्त्री० गंधिनी, गंधिन ] १. सुगंधित तेल और इत्र आदि बेचनेवाला । २. गँधिया घास । गंभीर - वि० १. गहरा । २. घना । ३. गूढ़ । गँव | संज्ञा स्त्री० १. घात । २. मत- लब । गवई - संज्ञा स्त्री० [वि० गवइयाँ ] गाँव की बस्ती । गँवरमसला - संज्ञा पुं० गँवारों की कहावत या उक्ति / गवाना- क्रि० स० १. काटना | २. खोना । गँवार - वि० [स्त्री० गँवारी, गँवारिन । २०८ गज़ वि० गँवारू, गँवारी ] १. गाँव का रहनेवाला । २. मूर्ख | गँवारी - संज्ञा स्त्री० १. देहातीपन । २. मूर्खता । ३. गँवार स्त्री । वि० १. गँवार का सा । २. भद्दा । गँवारू - वि० दे० " गँवारी" । गंस - संज्ञा पुं० १. द्वेष । २. ताना । तीर की नाक । संज्ञा स्त्री० तीर की नेाक । गई करना क्रि० प्र० छोड़ देना । गई बहार - वि० खोई हुई वस्तु को पुनः देने अथवा बिगड़े हुए काम को बनानेवाला । गऊ - संज्ञा स्त्री० गाय । गगन-संज्ञा पुं० १. श्राकाश । २. शून्य स्थान । ३. छप्पय छंद का एक भेद । गगनचर -संज्ञा पुं० पक्षी । गगनभेदी, गगनस्पर्शी - वि० बहुत ऊँचा । गगरा - संज्ञा पुं० [स्त्री० अल्पा० गगरो ] कलसा । गच-संज्ञा पुं० १. किसी नरम वस्तु में किसी कड़ी या पैनी वस्तु के धँसने का शब्द । २. चूने, सुरखी का मसाला, जिससे ज़मीन पक्की की जाती है । ३. पक्का फ़र्श । गचकारी-संज्ञा खो० गच का काम । गछना - क्रि० भ० चलना । क्रि० स० १. चलाना । २. अपने ज़िम्मे लेना । गज - संज्ञा पुं० [स्त्री० गजो ] हाथी । गज़ -संज्ञा पुं० लंबाई नापने की एक माप जो सोलह गिरह या तीन फुट की होती है ।