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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२२०

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गद्गद् गद्गद - वि० १. अत्यधिक हर्ष, प्रेम, श्रद्धा आदि के आवेग से पूर्ण । २. प्रसक्ष । गए संज्ञा पुं० १. मुलायम जगह पर किसी चीज़ के गिरने का शब्द । २. किसी गरिष्ठ या बहदी न पचनेवाली चीज़ के कारण पेट का भारीपन । गद्दर - वि० १. अधपका । २. मोटा गद्दा । गहा- संज्ञा पुं० भारी तोशक । गद्दी - संज्ञा स्त्री० १. छोटा गद्दा । २. व्यवसायी श्रादि के बैठने का स्थान । ३. विसी बड़े अधिकारी का पद । गद्दीनशीन - वि० १. सिंहासनारूढ़ । २. उत्तराधिकारी । गद्य -संज्ञा पुं० वह लेख जिसमें मात्रा और वर्ण की संख्या और स्थान श्रादि का कोई नियम न हो । गधा - संज्ञा पुं० दे० " गदहा " । गन - संज्ञा पुं० दे० " गण" । गनगन-संज्ञा स्त्री० कपिने या रोमांच होने की मुद्रा । गनगनाना- क्रि० प्र० शीत श्रादि से रोमांच या कंप होना । क्रि० प्र० गिना जाना । ग़नीमत - संज्ञा स्त्री० संतोष की बात । गन्ना - संज्ञा पुं० ईख । गृप - संज्ञा स्त्री० [वि० राप्पी ] १. इधर उधर की बात, जिसकी सत्यता का निश्चय न हो । २. अफ़वाह । संज्ञा पुं० १. वह शब्द जो झट से निगलने, किसी नरम अथवा गीली वस्तु में घुसने आदि से होता है । २. निगलने या खाने की क्रिया । गपकना - क्रि० स० चटपट निगलना । गपड़ चौथ-संज्ञा स्त्री० व्यर्थ की बात । २१२ वि० [अंड बंड | गपना- क्रि० स० ग्रुप मारना । गपाड़ा - संज्ञा पुं० मिथ्या बात । गप्प - संज्ञा स्त्री० दे० "गुप" । गप्पा - संज्ञा पुं० धोखा । गप्पी - वि० गप मारनेवाला । गल्फा-संज्ञा पुं० १. बड़ा कौर । लाभ । गफ - वि० घना । गमन गफलत - संज्ञा स्त्री० १. असावधानी । २. भूल । ग़बन - संज्ञा पुं० किसी दूसरे के सैपि हुए माल को खा लेना । गबरू - वि० १. पट्टा । २. सीधा । + संज्ञा पुं० दूल्हा । गबरून - वि० चारख़ाने की तरह का एक मोटा कपड़ा । गम्बर - वि० १. घमंडी । २. मंद । गभस्ति - संज्ञा पुं० १. किरण । सूर्य । २. संज्ञा स्त्री० श्रभि की स्त्री, स्वाहा । गभस्तिमान् -संज्ञा पुं० सूर्य्य । गभीर - वि० दे० "गंभीर" । भुवार - वि० १. गर्भ का (घास) । २. जिसका मुंडन न हुआ हो । ३. नादान । गम-संज्ञा स्त्री० पहुँच । गम - संज्ञा पुं० १. दुःख । २. चिंता । गंमक-संज्ञा पुं० बतलानेवाला । संज्ञा स्त्री० सुगंध । गमकना - क्रि० अ० महकना । गमखोर - वि० [संज्ञा गमखोरी] सहन- शीलं । गमन - संज्ञा पुं० [वि० गम्य] १० जाना । २. संभोग । ३. राह । * क्रि० भ० सोच करना ।