गांग वि० दुर्गम । गांग - वि० गंगा-संबंधी । गांगेय - संज्ञा पुं० १. भीष्म । २. कार्तिकेय । ३. कसेरू । गज - संज्ञा पुं० राशि | गांजना- क्रि० स० राशि लगाना । गाँजा - संज्ञा पुं० भांग की जाति का एक पौधा जिसकी कली का धुआँ पीते हैं । गाँठ-संज्ञा स्त्री० [वि० गॅठीला ] १. गिरह । २. गठरी । ३. जोड़ | गठगोभी -संज्ञा स्त्री० गोभी की एक जाति जिसकी जड़ में खरबूज़े की सी गोल गाँठ होती है । गाँठना- क्रि० स० १. गाँठ लगाना । २. मिलाना । गांडर - संज्ञा स्त्री० मूँज की तरह की एक घास । गांडा-संज्ञा पुं० [स्त्री० गॅडी] १. किसी पेड़, पौधे या डंठल का छोटा कटा खंड । २. ईख का छोटा कटा टुकड़ा । गांडीव - संज्ञा पुं० अर्जुन का धनुष । गांथना - क्रि० स० गूँथना । गांधर्व - वि० गंधर्व-संबंधी । संज्ञा पुं० १. गान विद्या । २. भाठ प्रकार के विवाहों में से एक जिसमें वर और कन्या परस्पर अपनी इच्छा से प्रेमपूर्वक मिलकर पति-पत्निवत् रहते हैं । गांधर्व वेद-संज्ञा पुं० १. सामवेद का उपवेद । २. संगीत - शास्त्र । गांधी - संज्ञा स्त्री० गुजराती वैश्यों की एक जाति । गांभीर्य्य-संज्ञा पुं० गंभीरता । गाँव, गाँव-संज्ञा पुं० खेड़ा । २१७ गाज गाँस -संज्ञा स्त्री० १. बैर । २. गांठ । ३. निगरानी । गाँसना- क्रि० ६० स० १. गूंथना । २. पकड़ में करना । गाँसी -संज्ञा स्त्री० तीर या बरछी का फल । गागर, गागरी+-संज्ञा स्त्री० दे० "गगरी" । 1 गाछ - संज्ञा पुं० पौधा । गाज - संज्ञा स्त्री० १. शोर । २. बिजली । संज्ञा पुं० फेन । गाजना- क्रि० प्र० १. गरजना । २. हर्षित होना । एक पौधा जिसका गाजर-संज्ञा स्त्री० कंद मीठा होता है । ग़ाज़ी - संज्ञा पुं० १. मुसलमानों में वह वीर पुरुष जो धर्म के लिये विध- र्मियों से युद्ध करे । २. बहादुर । गाड़ - संज्ञा स्त्री० गड़हा । गाड़ना- क्रि० स० १. तापना । २. जमाना । ३. धँसाना । गाडर + संज्ञा स्त्री० भेड़ । गाड़ा -संज्ञा पुं० बैलगाड़ी । गाड़ी - संज्ञा स्त्री० एक स्थान से दूसरे स्थान पर माल असबाब या प्राद- गाड़ीवान -संज्ञा पुं० गाड़ी हाँकनेवाला । मियों को पहुँचाने के लिये एक यंत्र । गाढ़ - वि० १. अधिक । २. घना । ३. विकट । संज्ञा पुं० कठिनाई | गाढ़ा - वि० [स्त्री० गाढ़ी ] १. उस । मोटा । २. घनिष्ठ । ३. कठिन । संज्ञा पुं० एक प्रकार का मोटा सूती कपड़ा । गात - संज्ञा पुं० शरीर । गात्र - संज्ञा पुं० अंग ।
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