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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२३१

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गुणक ग एक-संज्ञा पुं० वह श्रंक जिससे किसी श्रंक को गुणा करें । गुणकारक (कारी) - वि० लाभ- दायक | गुणग्राहक - संज्ञा पुं० गुणियों का आदर करनेवाला मनुष्य । गणग्राही - वि० दे० " गुणग्राहक " | गुणज्ञ - वि० १. गुण को पहचानने- वाला । २. गुणी । या क २२३ गुणन - संज्ञा पुं० [वि० गुण्य, गुणनीय, गुणित ] १. गुणा करना । २. गिनना । ३. मनन करना । गुणनफल - संज्ञा पुं० वह अंक संख्या जो एक अंक को दूसरे के साथ गुणा करने से श्रावे । गुणना- क्रि० स० गुणन करना । गुणवंत - वि० दे० " गुणवान्" । गुणवाचक - वि० जो गुण को प्रकट करे । गुणवान् - वि० वाला । स्त्री० गुणवती ] गुण- गुणांक -संज्ञा पुं० वह श्रंक जिसको गुणा करना हो । गुणा-संज्ञा पुं० [वि० गुण्य, गुणित ] गणित की एक क्रिया । जरब । गणाढ्य - वि० गुणपूर्ण । गुणानुवाद-संज्ञा पुं० गुण-कथन । प्रशंसा । गणित - वि० गुणा किया हुआ । गुणी - वि० गुणवाला | संज्ञा पुं० हुनरमंद | ग त्थी -संज्ञा स्त्री० गिरह | गुथना - क्रि० प्र० १. एक गुच्छे में नाथा जाना । सिलाई होना । गुनमा खड़ी या २. भद्दी गथवाना - क्रि० स० गूंथने का काम दूसरे से कराना । गुदकार, गदाकारा - वि० १. गूदे दार । २. गुदगुदा । ग ुदग ुदा - वि० १. गूदेदार । मांस से भरा हुआ । २. मुलायम । गुदग ुदाना- क्रि० प्र० हँसाने या छेड़ने के लिये किसी के तलवे, काँख आदि को सहलाना । ग ुदग ुदी - संज्ञा स्त्री० १. वह सुरसुरा- हट या मीठी खुजली जो मांसल स्थानों पर उँगली आदि छू जाने से होती है । २. उत्कंठा । गुदड़ी-संज्ञा स्त्री० फटे-पुराने टुकड़ों को जोड़कर बनाया हुआ कपड़ा । गुदना-संज्ञा पुं० दे० " गोदना " । क्रि० अ० चुभना । गुदरना- क्रि० भ० गुज़रना । क्रि० स० विवेदन करना । गुदाना - क्रि० स० गोदने की क्रिया कराना । गु दो + -संज्ञा पुं० १. फल के बीज के भीतर का गूदा । २. सिर का पिछला भाग । ३. हथेली का मांस | गनः +-संज्ञा पुं० दे० "गुण" । गँ नग ना - वि० दे० "कुनकुना" । गुण्य-संज्ञा पुं० वह क जिसको गनगनाना- क्रि० प्र० १. गुनगुन गुणा करना हो । त्थमग त्था -संज्ञा पुं० १. उलझाव । २. भिड़ंत । C शब्द करना । २. अस्पष्ट स्वर में गाना । गुनना- क्रि० स० गिनना ।