गुहा कराना | गुधवाना । गुहा - संज्ञा स्त्री० गुफा गुहाई - संज्ञा खी० १. गुहने की क्रिया, ढंग या भाव। २. गुहने की मज़दूरी । गुहार - संज्ञा स्त्री० रक्षा के लिये पुकार । दोहाई | गुह्य - वि० १. गुप्त । ३. गूढ़ । २. गोपनीय । गुह्यपति-संज्ञा पुं० कुत्रेर । गूँगा - वि० [स्त्री० गूँगी ] जो बोल न सके । गूज -संज्ञा स्त्री० १. गुंजार । २. प्रतिध्वनि । ३. लट्टू की कील | ४. कान की बालियों में लपेटा हुआ पतला तार । गूँजना-क्रि २. प्रतिध्वनित होना । गूँथना - कि० स० दे० "गूँथना” । अ० १. गुजारना । गूधना- क्रि० स० माड़ना । क्रि० स० पिरोना । गूजर - संज्ञा पुं० [ खो० गूजरो, गुज- रिया ] ग्वाला | गूजरी - संज्ञा खौ० १. गूज़र जाति की स्त्री । २. पैर में पहनने का एक जेवर | २. गूढ़ - वि० १. गुप्त । २. कठिन । गूढ़ता - संज्ञा खो० १. गुप्तता । कठिनता । यूथना - क्रि० स० पिरोना । गूदड़ -संज्ञा पुं० [स्त्री० गूदड़ो ] चिथड़ा | गूदा -संज्ञा पुं० [स्त्री० गूदो ] फल के भीतर का वह अंश जिसमें रस आदि रहता है। २२७ गैड़ा गून -संज्ञा स्त्री० वह रस्सी जिससे नाव खींचते हैं। गूमा-संज्ञा पुं० एक छोटा पौधा । गूलर-संज्ञा पुं० वट वर्ग का एक बड़ा पेड़ जिसमें लड्डू के से गोल फल लगते हैं 1 गृध-संज्ञा पुं० गिध । गृह-संज्ञा पुं० [वि० गृहो ] १. घर । २. कुटुंब । गृहप, गृहपति-संज्ञा पुं० [ खो० गृहपलो ] १. घर का मालिक । २. श्रनि । गृहयुद्ध - संज्ञा पुं० १. घर के भीतर का झगड़ा । २. किसी देश के भीतर ही आपस में होनेवाली लड़ाई । गृहस्थ-संज्ञा पुं० १. घर बारवाला | २ वह जिसके यहाँ खेती होती हो । गृहस्थाश्रम -संज्ञा पुं० चार श्राश्रमों में से दूसरा आश्रम जिसमें लोग विवाह करके रहते और घर का काम-काज देखते हैं । गृहस्थी -स -संज्ञा स्त्री० १. गृह-व्यवस्था । २. खेती-बारी । गृहिणी - संज्ञा स्त्री० १. घर की मालि- किन । २. स्त्री । गृही-सज्ञा पुं० [स्त्री० गृहिणी] गृहस्थ | गृह्य - वि० गृह संबंधी । गैड़ | -संज्ञा पुं० ईख के ऊपर का पत्ता । संज्ञा पुं० घेरा । गेंड़ना - क्रि० स० १. खेतों को मेड़ से घेरकर हद बाँधना । २. घेरना । गैड़ा-संग पुं० १. ईख के ऊपर के पन्त । २. ईख ।
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