गैड़ भा गेंडा | - संथा पुं० १. तकिया । २. गैडुरी- -संज्ञा स्त्री० रस्सी का बना हुआ मेंडरा जिस पर घड़ा रखते हैं । हूँ डुरी । गेंद -संज्ञा पुं० कपड़े, रबर या चमड़े का गोला जिससे लड़के खेलते हैं कंदुक 1 गेंदा -संज्ञा पुं० एक पौधा जिसमें पीले रंग के फूल लगते हैं गेंदुकः-संज्ञा पुं० गेंद | - संज्ञा पुं० तकिया । गेंदुवा - गेढ़ना- क्रि० स० १. लकीर से घेरना । २. परिक्रमा करना । गेय - वि० गाने के लायकु । गेरना - क्रि० स० १. गिराना । ढालना । गेर श्रा - वि० गेरू के रंग का । २. गेरू - संज्ञा स्त्री० एक प्रकार की लाल कड़ी मिट्टी जो खाने से निकलती है। गेह संज्ञा पुं० घर | गेहनी - संज्ञा स्त्री० घरवाली । गेही-संज्ञा पुं० गृहस्थ । गेहुँचन - संज्ञा पुं० मटमैले रंग का एक अत्यंत विषधर फनदार सपि । गेहुँआ - वि० गेहूँ के रंग का । गेहूँ -संज्ञा पुं० एक प्रसिद्ध श्रनाज जिसके चूर्ण की रोटी बनती है । गैंडा-संज्ञा पुं० भैंसे के श्राकार का एक पशु जो ऐसे दलदलों और कछारों में रहता है जहाँ जंगल होता है । मैन संज्ञा पुं० मार्ग | 1
- संज्ञा पुं० दे० "गगन" । ग़ ब-संज्ञा पुं० परोक्ष |
२२८ गोर्यां गैबी - वि० १. गुप्त । २. अजनबी । गैयर - संज्ञा पुं० हाथी । गैया - संज्ञा स्त्री० गाय । गैर - वि० अन्य | गैरत - संज्ञा स्त्री० लज्जा । • गैरमामूली - वि० असाधारण । गैर मुनासिब - वि० अनुचित | * गैर मुमकिन - वि० असंभव । गैरवाजिब - वि० अयोग्य । गैरहाजिर - वि० अनुपस्थित | * गैरहाज़िरी -संज्ञा खो० अनुपस्थिति । गैरिक-संज्ञा पुं० १. गेरू । २. सोना । गैल - संज्ञा स्त्री० मार्ग । गांठ-संज्ञा स्त्री० धोती की लपेट जो कमर पर रहती है। मुर्री । गोठना - क्रि० स० १. किसी वस्तु की नाक या कोर गुठली कर देना । २. गो या पुर्व की कोर को मोड़ मोड़कर उमड़ी हुई लड़ी के रूप में करना । क्रि० स० चारों ओर से घेरना । गोंड़-संज्ञा पुं० एक असभ्य जाति जो मध्य प्रदेश में पाई जाती है । गोड़ा-संज्ञा पुं० १. बाड़ा । २. पुरा । गोंद -संज्ञा पुं० पेड़ों के तने से निकला हुआ चिपचिपा या लसदार पसेच । लासा । गो- संज्ञा स्त्री० गाय । अव्य० यद्यपि । प्रत्य० कहनेवाला । गोइठा | -संज्ञा पुं० ईंधन के लिये सुखाया हुआ गोबर । उपला । गोइंदा - संज्ञा पुं० जासूस । गोय-संज्ञा पुं० [स्त्री० साथ में रहने-