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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२३७

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गोई १. वाला । साथी । गोई -संज्ञा स्त्री० दे० " गोइयाँ" । गोऊ - वि० चुरानेवाला । गोकर्ण - संज्ञा पुं० १. हिंदुह्रों का एक शैव क्षेत्र जो मलाबार में है । २. इस स्थान में स्थापित त्रिमूर्त्ति । वि० गऊ के से लंबे कानवाला । गोकुल - संज्ञा पुं० , गौधों का झुंड । २. गोशाला । गोक्षुर -संज्ञा पुं० दे० " गोखरू” । गोखा -संज्ञा पुं० दे० "झरोखा" । गोग्रास-संज्ञा पुं० पके हुए अन्न का वह थोड़ा सा भाग जो भोजन या श्राद्धादिक के प्रारंभ में गौ के लिये निकाला जाता है । गोचर -संज्ञा पुं० १. वह विषय जिसका ज्ञान इंद्रियों द्वारा हो सके । चरागाह । २. गोजर - संज्ञा पुं० कनखजूग । गोजी + - संज्ञा स्त्री० १. गौ हाँकने की लकड़ी । २. लट्ठ | गोभनघट-संज्ञा स्त्रो० स्त्रियों की साड़ी का श्रंचल | पल्ला । गोझा - संज्ञा पुं० [स्त्री० अल्पा गोमिया, गुझिया ] १. गुझिया नामरु पक- वान । २. खलीता । गेट-संज्ञा स्त्री० वह पट्टी या फीता जिसे किसी कपड़े के किनारे लगाते हैं । मगज़ी । संज्ञा खा० मंडली । संज्ञा स्त्री० चापड़ का मोहरा । गोटो | गेटा - संज्ञा पुं० पतला फीता जो कपड़ों के किनारे पर लगाया जाता है । गोटी-संज्ञा बी० १. कंकड़, गेरू, पत्थर इत्यादि का छोटा गोल टुकड़ा जिससे लड़के अनेक प्रकार के खेल २२६ गोदा I २. चौपड़ खेलने का मोहरा । नरद । ३. एक खेल जो गोटियों से खेला जाता है । गोठ -संज्ञा खो० १. गोशाला । २. श्राद्ध । गोड़ा-संज्ञा पुं० पैर | गोइत -संज्ञा पुं० गाँव में पहरा देनेवाला चौकीदार | गोड़ना - क्रि० स० मिट्टी खोदना और उलट पुलट देना जिसमें वह पोली और भुरभुरी हो जाय । गोड़ा + - संज्ञा पुं० पलंग आदि का पाया । गोड़ाई -संज्ञा पुं० गोड़ने की क्रिया या मज़दूरी । गोडारी | -संज्ञा स्त्री० २. जूना । १. पैताना । गोड़िया -संज्ञा स्त्रो० छोटा पैर । गोत संज्ञा पुं० १. कुज । २. समूह | गोता-संज्ञा पुं० डुब्बी । गोताखोर -संज्ञा पुं० डुबकी लगाने- वाला । गोतिया - वि० दे० " गोती" । गोती - वि० अपने गोत्र का गोत्र - संज्ञा पुं० १. संतति । २. नाम । ३. क्षेत्र । ४. समूह । ५. वंश । गोद-संज्ञा खी० १. कोरा । २. अंचल । गोदनहारी - संज्ञा स्त्री० के जड़ या नट जाति की खो जो गोदना गोदने का काम करती है। 1 गोदना - क्रि० स० चुभाना । संज्ञा पुं० तिल के आकार का काला चिह्न जो शरीर में नील या कोयले के पानी में डूबा हुई सुइयों से पाछ- कर बनता है । गोदा -संज्ञा पुं० बड़, पीपल या पाकर