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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२३८

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गोदान के पक्के फल | गोदान - संज्ञा पुं० गौ को विधिवत् संकल्प करके ब्राह्मण को दान करने की किया । गोदाम - संज्ञा पुं० वह बड़ा स्थान जहाँ बहुत सा बिक्रीका माल रखा जाता हो। गोदावरी -संज्ञा स्त्री० दक्षिण भारत की एक नदी । गोदी-संज्ञा बी० दे० "गोद" । गोधन - संज्ञा पुं० १. गौश्रों का समूह। गौ रूपी संपत्ति । २. + संज्ञा पुं० गोवर्द्धन पर्वत । उड़ने के गोधूम - संज्ञा पुं० गेहूँ | गोधूलि, गोधूली - संज्ञा स्त्री० वह समय जब कि जंगल से चरकर लौटती हुई गौ के खुरों से धूल कारण धुंधली छा जाय । गोन-संज्ञा स्त्री० टाट, कंबल, चमड़े आदि का बना दोहरा बोरा जो बैलें की पीठ पर लादा जाता है । संज्ञा स्त्री॰ रस्सी जिसे नाव खींचने के लिये मस्तूल में बधिते हैं । गोना - क्रि० स० छिपाना । गोनिया -संज्ञा स्त्री० दीवार या कोने आदि की सीध जांचने का औज़ार । संज्ञा पुं० स्वयं अपनी पीठ पर या बैले पर लादकर बोरे ढोनेवाला । गोनी-संज्ञा स्त्री० टाट का थैला । गाव - संज्ञा पुं० १. गौ की रक्षा करने- वाला । २. ग्वाला । संज्ञा पुं० गले में पहनने का एक आभूषण । गोपन -संज्ञा पुं० १. छिपाव। २.२क्षा । गोपना- क्रि० स० छिपाना । गोपनीय - वि० छिपाने के लायक । २३० गोमुखी गोपांगना - संज्ञा स्त्री० गोप जाति की स्त्री । गोपा - संज्ञा स्त्री० गाय पालनेवाली, हरिन । गोपाल - संज्ञा पुं० १. गौ का पालन- पोषण करनेवाला | २. अहीर । ३. श्रीकृष्ण । गोपाष्टमी - संज्ञा स्त्री० कार्तिक शुक्ला अष्टमी । गोपिका-संज्ञा स्त्री० १. गोप की स्त्री । गोपी । २. श्रीरिन । गोपी-संज्ञा स्त्री० १. ग्वालिनी । २. श्रीकृष्ण की प्रेमिका व्रज की गोप- जातीय स्त्रियाँ | गोपीचंदन - संज्ञा पुं० एक प्रकार की पीली मिट्टी । गोपीनाथ - संज्ञा पुं० श्रीकृष्ण । गोपुर- संज्ञा पुं० १. नगर द्व २. किले का फाटक । ३. फाटक । ४. स्वर । गोफन, गोफना - संज्ञा पुं० ढलवाँस । गे। फा - संज्ञा पुं० नया निकला हुआ बँधा पत्ता | गोबर - संज्ञा पुं० गौ का मल । गोबर गणेश - वि० १. भद्दा । २. मूर्ख । गोबरी - संज्ञा स्त्री० कंडा । गोबरैला - संज्ञा पुं० दे० " गुबरैला " । गोभी -संज्ञा स्त्री० एक प्रकार का शाक। गोमती - संज्ञा स्त्री० एक नदी । गोमय-संज्ञा पुं० गोबर । गोमुख - संज्ञा पुं० १. गो का मुँह । २. वह शंख जिसका श्राकार गौ के मुँह के समान होता है । गोमुखी - संज्ञा स्त्री० १. एक प्रकार की थैली जिसमें हाथ डालकर माला फेरते हैं । २. गौ के मुँह के आकार